
मुंबई। देश के डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) क्षेत्र में महाराष्ट्र अग्रणी भूमिका निभा रहा है और डेटा सेंटर उद्योग में राज्य ने मजबूत स्थान स्थापित किया है। अगले तीन वर्षों में महाराष्ट्र वैश्विक डेटा सेंटर उद्योग में अग्रणी राज्य के रूप में उभरेगा। यह विश्वास राज्य के पणन एवं राजशिष्टाचार मंत्री जयकुमार रावल ने व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर हो रहा अंतरराष्ट्रीय निवेश, नवीकरणीय ऊर्जा का बढ़ता उपयोग और मजबूत डिजिटल आधारभूत संरचना के कारण महाराष्ट्र डेटा सेंटर और एआई कंपनियों का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। शुक्रवार को पश्चिम क्षेत्र के कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) द्वारा आयोजित सातवें डेटा सेंटर ब्लूप्रिंट सम्मेलन में मंत्री रावल बोल रहे थे। इस सम्मेलन में नीति निर्माता, निवेशक और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विशेषज्ञ बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
मंत्री रावल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) वैश्विक अर्थव्यवस्था की संरचना को तेजी से बदल रही है और स्वास्थ्य, वित्त, उत्पादन तथा कृषि सहित कई क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन ला रही है। वर्तमान में भारत के लगभग 50 प्रतिशत डेटा सेंटर महाराष्ट्र में स्थित हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश के लिए 80 सामंजस्य समझौते (एमओयू) किए गए हैं, जिससे राज्य में वैश्विक निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। मंत्री रावल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के कारण भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है। मजबूत डिजिटल आधारभूत संरचना, तेजी से विकसित हो रहा स्टार्टअप इकोसिस्टम और कुशल मानव संसाधन के कारण भारत एआई क्षेत्र में नवाचार का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र ने प्रौद्योगिकी और डिजिटल अवसंरचना क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित किया है। वर्तमान में देश की कुल कार्यरत डेटा सेंटर क्षमता का आधा से अधिक हिस्सा महाराष्ट्र में है और मुंबई देश के डिजिटल प्रवेश द्वार के रूप में विकसित हो रही है। मंत्री रावल ने कहा कि कई वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों ने भी महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। अमेज़न वेब सर्विसेज, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और प्रिंसटन डिजिटल ग्रुप ने मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र में बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट स्थापित किए हैं। इसके अलावा टिलमैन ग्लोबल होल्डिंग्स ने महाराष्ट्र में 1 गीगावॉट डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म के लिए लगभग 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है। वहीं ब्रुकफील्ड कॉरपोरेशन और आरएमजेड कॉर्प ने मुंबई महानगर क्षेत्र में डिजिटल आधारभूत संरचना और इनोवेशन जिलों के विकास के लिए बड़े निवेश की घोषणा की है। लोढ़ा डेवलपर्स और अडानी समूह ने भी मुंबई और नवी मुंबई क्षेत्र में महत्वपूर्ण निवेश की घोषणा की है। मंत्री रावल ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार के उद्योग, निवेश और सेवा नीति 2025 के तहत वर्ष 2030 तक राज्य को भारत की पहली ट्रिलियन डॉलर उप-राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस नीति के माध्यम से 70 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने और लगभग 50 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि एआई और हाइपरस्केल डेटा सेंटर के विस्तार के लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उत्तर महाराष्ट्र के धुले जिले में सौर और पवन ऊर्जा की बड़ी संभावनाएं हैं, जिससे भविष्य के ग्रीन डेटा सेंटर को ऊर्जा आपूर्ति की जा सकती है। मंत्री रावल ने यह भी बताया कि भारत में वर्तमान में 1500 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर) कार्यरत हैं, जो एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में देश की बढ़ती क्षमता को दर्शाते हैं।




