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विशेष बच्चों के सर्वांगीण विकास में महाराष्ट्र देश के लिए बना दिशादर्शक : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

‘दिशा’ अभियान से जुड़े राज्य के सभी विशेष शिक्षकों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित करेगी सरकार

मुंबई। समावेशी विकास भारतीय संस्कृति का मूल आधार है और समाज में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे को उचित अवसर और अनुकूल वातावरण मिलना आवश्यक है। ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग का विकास जरूरी है। इसी उद्देश्य से ‘दिशा’ अभियान के माध्यम से विशेष बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। अभियान से जुड़े राज्य के सभी विशेष शिक्षकों को उनके अमूल्य योगदान के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। यह बात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कही। गुरुवार को शिक्षक दिवस की पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री के ‘वर्षा’ सरकारी निवास पर आयोजित कार्यक्रम में विशेष शिक्षकों का राज्यस्तरीय सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि विशेष बच्चों को उचित शिक्षा, अवसर और वातावरण उपलब्ध कराना सामूहिक जिम्मेदारी है और इस क्षेत्र में महाराष्ट्र पूरे देश के लिए दिशादर्शक बन रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेष बच्चों का मूल्यांकन केवल अंकों के आधार पर नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास और समाज में घुलने-मिलने की क्षमता के आधार पर किया जाना चाहिए। सभी विशेष स्कूलों में ‘दिशा’ अभियान अपनाने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य है। वर्तमान में राज्य के 36 जिलों की 450 से अधिक स्कूलें, 2,700 से अधिक शिक्षक और 21 हजार से अधिक दिव्यांग एवं बौद्धिक अक्षमता वाले विद्यार्थी इस अभियान से जुड़े हैं। अभियान के माध्यम से इन बच्चों को वैज्ञानिक और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के आधार पर शिक्षा देने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कार्यक्रम में प्रतीकात्मक रूप से पांच विशेष शिक्षकों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने राज्य की सभी जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में समारोह आयोजित कर सभी विशेष शिक्षकों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि ‘दिशा’ अभियान राज्य सरकार की प्राथमिकता वाला महत्वपूर्ण उपक्रम है और इसकी प्रगति तथा सामने आने वाली समस्याओं की नियमित समीक्षा ‘वॉर रूम’ के माध्यम से की जाएगी। दिव्यांग कल्याण विभाग की ओर से प्रत्येक वर्ष हर विशेष बच्चे और उसके परिवार तक ‘दिशा’ अभियान की उपयोगी मुद्रित वर्कबुक पहुंचाई जाएगी। इसके साथ ही नियमित स्कूलों में पढ़ने वाले बौद्धिक अक्षमता वाले बच्चों के लिए सामान्य शिक्षकों के प्रशिक्षण में भी इस पाठ्यक्रम को शामिल करने की दिशा में दिव्यांग कल्याण विभाग और जय वकील फाउंडेशन संयुक्त रूप से प्रयास करेंगे। बच्चों में विशेष जरूरतों की समय रहते पहचान के लिए एक विशेष ‘प्रशिक्षण मॉड्यूल’ भी विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जय वकील फाउंडेशन से इस दिशा में पहल करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार, समाज और सेवाभावी संस्थाओं की संयुक्त भागीदारी से इस क्षेत्र में व्यापक कार्य हुआ है। इस मॉडल के माध्यम से महाराष्ट्र दिव्यांग शिक्षा के क्षेत्र में पूरे देश के लिए मार्गदर्शक बन सकता है। उन्होंने जय वकील फाउंडेशन, बजाज फिनसर्व और एचटी पारेख फाउंडेशन सहित सामाजिक संस्थाओं द्वारा इस संवेदनशील विषय पर किए जा रहे कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में ‘दिशा अभियान’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पांच विशेष शिक्षकों को मुख्यमंत्री के हाथों प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। इनमें नवजीवन मतिमंद बच्चों की स्कूल, छत्रपति संभाजीनगर की यामिनी काले, पांडुरंग निवास मतिमंद विद्यालय, लातूर के अण्णासाहेब कदम, नंदनवन दुर्बल मनस्क बच्चों की स्कूल, नागपुर की वैशाली गायकवाड, स्व. रावसाहेब निवासी मतिमंद विद्यालय, देवली, वर्धा के ज्ञानेश्वर काले और जय वकील स्कूल फॉर चिल्ड्रन इन नीड ऑफ स्पेशल केयर, मुंबई की मानसी मुलाम शामिल हैं। कार्यक्रम में जय वकील फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चना चंद्र, एसीईसीएफ के सह-संस्थापक अमित चंद्र, जय वकील फाउंडेशन की अध्यक्ष एवं निदेशक डॉ. अनायता हेगड़े, बजाज फिनसर्व की अध्यक्ष शेफाली बजाज, एचटी पारेख फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिया लालकाका, दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव माणिक गुरसळ, आयुक्त सत्यजीत बडे, समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक संजय यादव, राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान के निदेशक राम कुमार और मुख्यमंत्री की विशेष कार्य अधिकारी प्रिया खान सहित राज्यभर के विशेष शिक्षक ऑनलाइन उपस्थित रहे।

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