
मुंबई। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व और सार्वजनिक जीवन भावी पीढ़ियों के लिए नेतृत्व, लोकतांत्रिक मर्यादा और नैतिक राजनीति का अनुपम आदर्श है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को नेतृत्व के गुण, राजनीति में शालीनता और सार्वजनिक जीवन में मूल्यों का महत्व समझना है, तो उन्हें अटल जी के जीवन का गंभीर अध्ययन करना चाहिए। राज्यपाल महाराष्ट्र लोकभवन में आयोजित समारोह में अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक एवं सार्वजनिक जीवन से जुड़े संस्मरणों पर आधारित पुस्तक अटल संस्मरण के लोकार्पण अवसर पर संबोधित कर रहे थे। यह पुस्तक अटल जी के पूर्व मीडिया सलाहकार अशोक टंडन द्वारा लिखी गई है और अटल जी की जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में प्रकाशित की गई है। राज्यपाल ने कहा कि वे स्वयं अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और विचारों से प्रेरित होकर सार्वजनिक जीवन एवं राजनीति में आए। उन्होंने कहा कि अटल जी केवल एक सफल प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि आदर्श विपक्ष के नेता, विलक्षण वक्ता, दूरदर्शी चिंतक और उच्च लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतीक थे। अपने अनुभव साझा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उत्तर-पूर्व के राज्यों में कठिन परिस्थितियों में संगठन का कार्य करते समय अटल जी हम जैसे कार्यकर्ताओं के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत रहे। उन्होंने बताया कि अटल जी से मिलने जाने पर वे सदैव उत्तर-पूर्व के प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देते थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए अटल जी जैसे थे, प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वैसे ही बने रहे। तेरह दिन की सरकार संकट में होने के बावजूद उन्होंने अपने सिद्धांतों और वैचारिक प्रतिबद्धता से कभी समझौता नहीं किया। राज्यपाल ने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि एक बार पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने अटल जी से पूछा कि वे जिस “भारतीयता” की बात करते हैं, उसका अर्थ क्या है। इस पर अटल जी ने मुस्कराते हुए कहा था, “आप बंगाल से हैं, लेकिन आपका नाम ‘सोमनाथ’ पश्चिम भारत के प्रसिद्ध तीर्थ से जुड़ा है—यही भारतीयता है।” राज्यपाल ने कहा कि यह उत्तर भारत की सांस्कृतिक एकात्मता और विविधता में एकता का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने वर्तमान समय में सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों के क्षरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि चाहे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) हो अथवा परमाणु ऊर्जा, किसी भी शक्ति का सदुपयोग तभी संभव है जब उसका उपयोग करने वाले व्यक्ति के पास नैतिकता और जीवन-मूल्य हों। उन्होंने कहा कि आज अनेक लोग शीघ्र सफलता और नेतृत्व प्राप्त करना चाहते हैं, लेकिन अटल जी ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी भी शॉर्टकट का सहारा नहीं लिया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री आशिष शेलार ने कहा कि ‘अटल संस्मरण’ उच्च साहित्यिक गुणवत्ता वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और जीवन-दर्शन को निकट से समझने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि लेखक अशोक टंडन ने कई वर्षों तक अटल जी के साथ कार्य किया है, इसलिए यह पुस्तक तथ्यपरक, प्रेरणादायी और आत्ममंथन के लिए प्रेरित करने वाली बनी है। आशिष शेलार ने कहा कि अटल जी का सार्वजनिक जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उनके विचारों और व्यवहार में कभी कटुता नहीं आई। वे अद्भुत वक्ता, सुसंस्कृत राजनेता और लोकतांत्रिक संवाद के सशक्त समर्थक थे। सहमति और संवाद के माध्यम से राजनीति करना ही उनका मूल मंत्र था। उन्होंने कहा कि अटल जी का हृदय कवि जैसा संवेदनशील था, लेकिन राष्ट्रहित के प्रश्न पर वे वज्र के समान दृढ़ हो जाते थे। भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने के बाद अनेक देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद उन्होंने अद्भुत धैर्य और दृढ़ता का परिचय दिया। लेखक अशोक टंडन ने अपने संबोधन में बताया कि उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी के साथ छह वर्षों तक निकटता से कार्य करने का अवसर मिला तथा प्रधानमंत्री पद से निवृत्त होने के बाद भी उनका संपर्क बना रहा। उन्होंने अटल जी की तेरह दिन की सरकार के गठन और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़े अनेक संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि जन्मशती वर्ष के अवसर पर प्रकाशित यह पुस्तक अटल जी के प्रति उनकी विनम्र श्रद्धांजलि है। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा, रवींद्र संघवी, बिनॉय बी. सहित साहित्य, संस्कृति, मीडिया और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।



