
नई दिल्ली। ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों की मौत से जुड़े घटनाक्रम को लेकर भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और दावों के अनुसार, भारतीय नागरिकों की जान जाने के बाद भारत ने अमेरिका के समक्ष अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है और समुद्री क्षेत्रों में नागरिक जहाजों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। बताया जा रहा है कि विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत कर भारतीय पक्ष की चिंताओं से अवगत कराया। भारत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर संचालित वाणिज्यिक जहाजों और उन पर कार्यरत नागरिक नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए तथा किसी भी सैन्य कार्रवाई में निर्दोष नागरिकों की जान नहीं जानी चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में ओमान की खाड़ी और होरमुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े सैन्य तनाव के बीच भारतीय नाविकों वाले कुछ जहाज प्रभावित हुए। दावा किया गया है कि एक जहाज पर हुई कार्रवाई में भारतीय नाविक हताहत हुए, जबकि दूसरे मामले में भारतीय चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया। इन घटनाओं के बाद भारत ने संबंधित पक्षों से विस्तृत जानकारी मांगी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कथित तौर पर यह भी कहा है कि नागरिक जहाजों के खिलाफ घातक सैन्य बल का प्रयोग वैश्विक समुद्री व्यापार, नौवहन सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय है। भारत ने समुद्री मार्गों पर कार्यरत नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता दोहराई है। इस बीच, विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने ईरान पर क्षेत्र में भारतीय जहाजों को निशाना बनाने के आरोप लगाए। हालांकि ईरान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया और पलटवार करते हुए कहा कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के लिए अमेरिका की नीतियां जिम्मेदार हैं। भारत स्थित ईरानी मिशन ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी आरोपों को अस्वीकार किया। विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा संकट पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य टकराव और होरमुज जलडमरूमध्य के आसपास अस्थिर सुरक्षा स्थिति से जुड़ा हुआ है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल होरमुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी प्रकार का संघर्ष अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयातित तेल और गैस पर निर्भर है। साथ ही, हजारों भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार से जुड़े हुए हैं, जिनकी सुरक्षा भारत सरकार की प्रमुख चिंता बनी हुई है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, भारत एक ओर अपने नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के साथ संबंधों में संतुलन भी बनाए रखना चाहता है। हालांकि भारतीय पक्ष ने स्पष्ट संकेत दिया है कि नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मामलों में वह अपनी चिंताओं को मजबूती से उठाता रहेगा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष तक सीमित नहीं रह गया है। इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और विभिन्न देशों की विदेश नीतियों पर भी दिखाई देने लगा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित देश इस संकट को कम करने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।



