
मुंबई। इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट (IIS) से प्रशिक्षण और सहयोग प्राप्त करने वाले भारतीय खिलाड़ियों ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक अपने नाम किए। इनमें 3 स्वर्ण, 3 रजत और 4 कांस्य पदक शामिल हैं। IIS के खिलाड़ियों का योगदान भारत के कुल पदकों का लगभग एक-चौथाई रहा, जिससे भारत को पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल करने में महत्वपूर्ण मदद मिली। IIS से जुड़े खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स, बॉक्सिंग और जूडो जैसी प्रतिस्पर्धाओं में दमदार प्रदर्शन किया। इन खिलाड़ियों ने न केवल दबाव में बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया, बल्कि भारतीय खेलों के हाई-परफॉर्मेंस सिस्टम की सफलता भी साबित की। स्वर्ण पदक जीतने वालों में प्रीति पवार, सचिन सिवाच और हर्ष सिंह शामिल रहे, जिन्होंने क्रमशः बॉक्सिंग और जूडो में भारत का गौरव बढ़ाया। वहीं यामिनी मौर्य (महिला 57 किग्रा जूडो), गुलवीर सिंह (पुरुष 10,000 मीटर दौड़) और प्रवीण चित्रवेल (पुरुष ट्रिपल जंप) ने रजत पदक जीते। कांस्य पदक विजेताओं में सेल्वा प्रभु (पुरुष ट्रिपल जंप), सीमा कालीरामना (महिला डिस्कस थ्रो), गुलवीर सिंह (पुरुष 5,000 मीटर दौड़) और उन्नति शर्मा (महिला 63 किग्रा जूडो) शामिल रहीं। इन उपलब्धियों के साथ IIS समर्थित खिलाड़ियों ने तीनों खेलों में भारत को पदक दिलाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट की अध्यक्ष मनीषा मल्होत्रा ने कहा कि यह प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि जब खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय कोचिंग, खेल विज्ञान, चिकित्सा सहायता और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का वातावरण मिलता है, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये पदक केवल जीत नहीं, बल्कि भारतीय खेलों में दीर्घकालिक निवेश और व्यवस्थित प्रशिक्षण मॉडल की सफलता का प्रमाण हैं। IIS के हाई-परफॉर्मेंस डायरेक्टर गैरी हॉल ने कहा कि ग्लासगो में खिलाड़ियों ने दबाव के बीच लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर यह साबित किया कि सुनियोजित प्रशिक्षण, वैज्ञानिक तैयारी और विशेषज्ञों की समन्वित टीम किसी भी खिलाड़ी को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकती है। उन्होंने कहा कि अब संस्थान का पूरा ध्यान आगामी एशियन गेम्स पर है, जहां भारतीय खिलाड़ी और भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। IIS के खिलाड़ियों के इस शानदार प्रदर्शन ने एक बार फिर यह साबित किया है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक प्रशिक्षण और दीर्घकालिक योजना के बल पर भारत वैश्विक खेल मंच पर लगातार अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

