
नई दिल्ली। दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में कुसुमाग्रज मराठी सामरिक अध्ययन केंद्र का उद्घाटन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा किया गया, जहां उनके साथ मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत भी उपस्थित थे। हालांकि यह शैक्षणिक दृष्टि से मराठी भाषा के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था, लेकिन कार्यक्रम के दौरान स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े कुछ छात्रों ने मुख्यमंत्री फडणवीस के खिलाफ पोस्टर और काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने हिंदी भाषा को थोपने, महाराष्ट्र में गैर-मराठी लोगों पर हो रहे हमलों और राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी बोलने के लिए जबरदस्ती की जा रही है, जबकि कुछ ने आरोप लगाया कि सरकार हिंदी को जबरन लागू करने की कोशिश कर रही है। वहीं, कुछ छात्रों ने राज्य में हो रही क्षेत्रीय हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री से जवाब मांगा। जेएनयू में मराठी अध्ययन केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव करीब 17 साल पहले रखा गया था, लेकिन अब जाकर इसका उद्घाटन संभव हुआ है, जिसे मराठी भाषी छात्रों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस बीच, महाराष्ट्र में त्रिभाषा फार्मूले को लेकर भी राजनीतिक तनाव बना हुआ है, जहां मराठी, हिंदी और अंग्रेजी को प्राथमिक शिक्षा में शामिल करने के सरकार के प्रयासों का मनसे प्रमुख राज ठाकरे और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे विरोध कर रहे हैं। ऐसे समय में जब राज्य में हिंदी बनाम मराठी की बहस चल रही है, दिल्ली में मराठी अध्ययन केंद्र की शुरुआत को सरकार द्वारा संतुलन साधने की एक सांस्कृतिक और राजनीतिक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि उद्घाटन कार्यक्रम का उद्देश्य मराठी भाषा को राष्ट्रीय शैक्षणिक मंच पर स्थान देना था, लेकिन छात्रों के विरोध ने यह स्पष्ट कर दिया कि भाषा अब केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि राजनीतिक असहमति और क्षेत्रीय पहचान का भी केंद्रबिंदु बन चुकी है।




