Monday, February 23, 2026
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दशहरा रैली में उद्धव ठाकरे ने भाजपा और आरएसएस पर किया तीखा हमला

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने मंगलवार को शिवतीर्थ मैदान पर अपनी परंपरागत दशहरा रैली में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा प्रहार किया। अपने भाषण में उद्धव ने सीधे संघ प्रमुख मोहन भागवत से सवाल करते हुए कहा कि आरएसएस की 100 साल की मेहनत के बाद जो ज़हरीले फल सामने आए हैं, क्या संघ संतुष्ट है? उन्होंने कहा- भागवत साहब, आपके शिष्य आज जो कर रहे हैं, क्या यह वही भारत है जिसके लिए आपने 100 साल काम किया? आरएसएस का इरादा ब्रह्मदेव का पिता बनने का था, लेकिन ब्रह्मदेव नहीं बने, तो ब्रह्मराक्षस बन गए। मैं जानबूझकर यह शब्द इस्तेमाल कर रहा हूँ और सबको जाकर गूगल करने की सलाह देता हूँ।
मोहन भागवत पर टिप्पणी
उद्धव ठाकरे ने मोहन भागवत की हाल की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि वे हिंदू-मुस्लिमों के बीच की खाई पाटने की कोशिश कर रहे हैं। इस पर भाजपा पर हमला करते हुए उन्होंने पूछा, क्या आपमें यह कहने की हिम्मत है कि भागवत ने हिंदुत्व छोड़ दिया है? जब भागवत मस्जिद गए थे और मुस्लिम नेता उमर अहमद इलासी ने उन्हें राष्ट्रपिता कहा था, तब भाजपा ने इसका विरोध क्यों नहीं किया?
भाजपा की नीतियों पर हमला
उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाया। उन्होंने कहा- एक तरफ भाजपा कार्यकर्ता सोफिया कुरैशी को पाकिस्तान के आतंकवादियों की बहन कहते हैं, जबकि वही हमारी बहन है। यही असली हिंदुत्व है। दूसरी तरफ, भाजपा ने बिलकिस बानो केस के दोषियों का स्वागत किया और रैलियाँ निकालीं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुस्लिम महिलाओं को रक्षा बंधन मनाने की नसीहत देते हैं। क्या यह विरोधाभास नहीं है?
हिंदुत्व पर अपनी परिभाषा
ठाकरे ने कहा कि असली हिंदुत्व भाईचारे, समानता और मानवीयता में है, न कि धर्म के आधार पर नफ़रत फैलाने में। उन्होंने भाजपा नेताओं पर तंज कसते हुए कहा- जो लोग एशिया कप जीतने के बाद क्रिकेट को युद्ध से जोड़ते हैं, वे देशभक्त नहीं बल्कि बेशर्म हैं। देशभक्ति हमें सिखाने से पहले खुद अपना आचरण देखें। उद्धव की इस रैली को सिर्फ़ भाजपा और आरएसएस पर हमला भर नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी पार्टी की विचारधारा को पुनः स्थापित करने की कोशिश माना जा रहा है। उद्धव ने स्पष्ट किया कि शिवसेना (यूबीटी) का हिंदुत्व भाजपा के हिंदुत्व से अलग है। जहाँ नफ़रत नहीं, बल्कि एकता और न्याय को प्राथमिकता दी जाएगी।

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