Homeउत्तर प्रदेशआपदा प्रबंधन में हैम रेडियो की भूमिका पर मण्डलीय कार्यशाला आयोजित

आपदा प्रबंधन में हैम रेडियो की भूमिका पर मण्डलीय कार्यशाला आयोजित

देवेश प्रताप सिंह राठौर/ झांसी, उत्तर प्रदेश। आपदा प्रबंधन कार्यों में हैम रेडियो (Ham Radio) के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट झांसी के नवीन सभागार में मण्डलीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता मण्डलायुक्त विमल कुमार दुबे ने की। कार्यक्रम में आपदा के समय वैकल्पिक संचार व्यवस्था के रूप में हैम रेडियो की उपयोगिता, तकनीकी विशेषताओं और संचालन संबंधी विस्तृत जानकारी दी गई।कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) झांसी पल्लवी मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) जालौन राजीव राज, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे ललितपुर संजय मिश्रा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी राजकिशोर राय, समस्त उपजिलाधिकारी, तहसीलदार तथा झांसी, जालौन और ललितपुर के विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।प्रशिक्षण सत्र में आपदा विशेषज्ञ धीरज पाठक, रेडियो निरीक्षक शैलेन्द्र कुमार तथा 114 इंजीनियरिंग रेजीमेंट के नायब सूबेदार फरादे विठल ने हैम रेडियो के तकनीकी एवं व्यवहारिक पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी।विशेषज्ञों ने बताया कि हैम रेडियो, जिसे एमेच्योर रेडियो भी कहा जाता है, एक गैर-व्यावसायिक दो-तरफा रेडियो संचार सेवा है। इसके माध्यम से बिना इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क के रेडियो तरंगों द्वारा देश-विदेश और अंतरिक्ष तक संपर्क स्थापित किया जा सकता है। यह सेवा लाइसेंस आधारित होती है और तकनीकी अनुसंधान, शिक्षा, शौक तथा विशेष रूप से आपदा के समय आपातकालीन संचार के लिए उपयोग की जाती है।कार्यशाला में बताया गया कि हैम रेडियो ट्रांसीवर और एंटीना की सहायता से कार्य करता है तथा निर्धारित रेडियो आवृत्तियों पर स्थानीय से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक संचार स्थापित कर सकता है। इसके माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) और उपग्रहों से भी संपर्क संभव है।विशेषज्ञों ने कहा कि भूकंप, बाढ़, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जब मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं ठप हो जाती हैं, तब हैम रेडियो राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सबसे भरोसेमंद संचार माध्यम साबित होता है। भारत में वर्ष 2001 के भुज भूकंप, 2004 की हिंद महासागर सुनामी और 2013 की उत्तराखंड आपदा के दौरान भी हैम रेडियो का प्रभावी उपयोग किया गया था।कार्यशाला में यह भी जानकारी दी गई कि भारत में हैम रेडियो संचालन के लिए संचार मंत्रालय के अधीन वायरलेस प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन (WPC) विंग द्वारा आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण कर लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। 12 वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक बिना किसी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के यह परीक्षा देकर लाइसेंस हासिल कर सकता है। लाइसेंस मिलने के बाद ऑपरेटर को सरकार की ओर से एक विशिष्ट कॉल साइन प्रदान किया जाता है।कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि आधुनिक संचार तकनीकों के बावजूद हैम रेडियो की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है, क्योंकि यह मोबाइल टावर, इंटरनेट सर्वर और विद्युत ग्रिड जैसी आधारभूत संरचनाओं पर निर्भर नहीं रहता। यही कारण है कि आपदा की स्थिति में यह एक अत्यंत विश्वसनीय और प्रभावी संचार माध्यम के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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