एचएसएनसी विश्वविद्यालय का पांचवां दीक्षांत समारोह, 45 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक

मुंबई। दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि जीवनभर सीखने की यात्रा की शुरुआत है। देश को केवल अच्छे डॉक्टर, इंजीनियर और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि अच्छे नागरिक और संवेदनशील नेतृत्व की भी आवश्यकता है। यह बात महाराष्ट्र के राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति जिष्णु देव वर्मा ने एचएसएनसी विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में कही। गुरुवार को राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा की अध्यक्षता में मुंबई विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित दीक्षांत समारोह में स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर 45 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने कहा कि देश की प्रगति के लिए विभिन्न क्षेत्रों में कुशल पेशेवरों की आवश्यकता है, लेकिन इसके साथ ही समाज के प्रति संवेदनशील अच्छे नागरिक और नेतृत्व तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “वंचितों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाला प्रत्येक व्यक्ति एक नेता होता है।” एचएसएनसी विश्वविद्यालय द्वारा कम समय में की गई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना करते हुए राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने व्यावसायिक जीवन में प्रवेश करते समय केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि सहानुभूति, करुणा, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी के मूल्यों को भी अपने साथ लेकर जाएं। उन्होंने कहा कि कॉलेज में मिलने वाली शिक्षा के साथ कक्षा के बाहर के अनुभव भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। समाज के साथ संवाद और जुड़ाव से विद्यार्थियों में टीम भावना, करुणा और सहानुभूति विकसित होती है। यही मूल्य आगे चलकर जिम्मेदार नेतृत्व तैयार करने में सहायक होते हैं। विश्वविद्यालयों को ‘अनुसंधान का केंद्र’ बताते हुए राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज के गरीब, कमजोर और वंचित वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि आज के विद्यार्थी ऐसे महत्वपूर्ण दौर में स्नातक हो रहे हैं, जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्र दुनिया को तेजी से बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि करुणा और सहानुभूति के बिना कृत्रिम बुद्धिमत्ता का कोई अर्थ नहीं है। तकनीक की वास्तविक शक्ति केवल इस बात में नहीं है कि वह क्या कर सकती है, बल्कि इस बात में है कि उसका उपयोग कितनी समझदारी और विवेक के साथ किया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रगति की परिभाषा केवल तकनीकी विकास तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें स्वास्थ्य, नैतिकता, मानवीय मूल्य और सामाजिक जिम्मेदारी भी शामिल होनी चाहिए। एचएसएनसी बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने बताया कि एचएसएनसी विश्वविद्यालय की ओर से मुंबई के निकट अलीबाग में विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय परिसर विकसित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. हेमलता बागला ने बताया कि वर्ष 2020 में तीन कॉलेजों के साथ शुरू हुए विश्वविद्यालय ने अब आठ यूनिवर्सिटी स्कूल स्थापित किए हैं और पांच अन्य कॉलेज भी विश्वविद्यालय के अंतर्गत आ चुके हैं। विश्वविद्यालय के प्रोवोस्ट अनिल हरिश ने कहा कि पिछले छह वर्षों में विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्तमान में विश्वविद्यालय में करीब 30 हजार विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर एचएसएनसी बोर्ड की ट्रस्टी माया शाहानी, कुलपति डॉ. हेमलता बागला, कुलसचिव भगवान बलानी, परीक्षा एवं मूल्यांकन निदेशक डॉ. जयेश जोगलेकर सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में स्नातक विद्यार्थी उपस्थित थे।

