
देवेश प्रताप सिंह राठौर/सीतापुर, उत्तर प्रदेश। बेसिक शिक्षा विभाग, सीतापुर द्वारा स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट (SIRD), लखनऊ में “सुशासन एवं शैक्षिक नेतृत्व कार्यशाला” का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) एवं शैक्षणिक मेंटर्स को आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए साझा शैक्षणिक दृष्टि, प्रभावी रणनीति और नेतृत्व कौशल से सशक्त बनाना था।कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीक्षा जोशी तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा उपस्थित रहे। यह कार्यशाला भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) लखनऊ एवं सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन (CSF) के सहयोग से आयोजित की गई। जनपद सीतापुर की यह पहल प्रशासनिक नेतृत्व के साथ-साथ शैक्षणिक नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में एक अभिनव प्रयास मानी जा रही है।अपने संबोधन में पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य बच्चों का प्रभावी ढंग से सीखना सुनिश्चित करना है। उन्होंने कक्षा स्तर से पीछे रह गए विद्यार्थियों के लिए कैच-अप शिक्षण (Catch-up Learning) को प्रभावी रूप से लागू करने तथा निपुण भारत मिशन के अगले चरण की तैयारी के लिए परिणामोन्मुख प्रयास करने का आह्वान किया।मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीक्षा जोशी ने प्रेरणादायी कार्य संस्कृति विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि ब्लॉक स्तर पर पीयर लर्निंग समूह बनाए जाएं, ताकि उत्कृष्ट कार्यों, नवाचारों और सफल प्रयोगों को साझा कर एक-दूसरे से सीखने की संस्कृति विकसित हो तथा शैक्षणिक सुधार को गति मिले।कार्यशाला में जनपद एवं ब्लॉक स्तर की शैक्षणिक प्राथमिकताओं, रणनीतियों, उनके प्रभावी क्रियान्वयन, मॉनिटरिंग व्यवस्था और सहयोग तंत्र पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि खंड शिक्षा अधिकारियों की भूमिका केवल प्रशासनिक निरीक्षण तक सीमित न रहकर विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण-अधिगम सुनिश्चित करने, शिक्षकों का मार्गदर्शन करने और सीखने के परिणामों में सुधार लाने की दिशा में भी सक्रिय होनी चाहिए।कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों एवं शैक्षणिक मेंटर्स ने आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए साझा लक्ष्य निर्धारित करने और विद्यालयों में बेहतर शिक्षण वातावरण विकसित करने के लिए समन्वित प्रयास करने का संकल्प भी लिया।

