Home Health & Fitness वर्षा ऋतु में सर्पदंश से बचाव के लिए जिलाधिकारी की अपील, केवल...

वर्षा ऋतु में सर्पदंश से बचाव के लिए जिलाधिकारी की अपील, केवल वैज्ञानिक उपचार पर करें भरोसा

0

देवेश प्रताप सिंह राठौर/झांसी, उत्तर प्रदेश। वर्षा ऋतु में खेतों, झाड़ियों और जलभराव वाले क्षेत्रों में सांपों के निकलने की घटनाएं बढ़ने के मद्देनज़र जिलाधिकारी गौरांग राठी ने जनपदवासियों से सतर्क रहने और सर्पदंश से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि थोड़ी-सी सतर्कता और समय पर उपचार से सर्पदंश से होने वाली मृत्यु और गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है। जिलाधिकारी ने नागरिकों से खेतों में कार्य करते समय ऊंचे जूते और दस्ताने पहनने, रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का उपयोग करने तथा घर और आसपास झाड़-झंखाड़, कूड़ा-कचरा और जलभराव न होने देने की सलाह दी। उन्होंने फर्श पर सोने के बजाय चारपाई का उपयोग करने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो घबराएं नहीं, बल्कि पीड़ित को शांत रखें और काटे गए अंग को यथासंभव स्थिर रखें। अनावश्यक रूप से चलने-फिरने से बचाएं और तुरंत निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल पहुंचाएं। यदि संभव और सुरक्षित हो तो सांप का रंग या पहचान याद रखने का प्रयास करें, लेकिन उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करें। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या किसी भी प्रकार के अंधविश्वास का सहारा नहीं लेना चाहिए। काटे गए स्थान पर चीरा लगाना, जहर चूसने का प्रयास करना, रस्सी, कपड़ा या तार से प्रभावित अंग को कसकर बांधना तथा किसी प्रकार की जड़ी-बूटी, तेल या रसायन लगाना खतरनाक हो सकता है।उन्होंने बताया कि सर्पदंश का एकमात्र प्रभावी और वैज्ञानिक उपचार एंटी स्नेक वेनम (ASV) है, जो सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है। आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सक ऑक्सीजन, अंतःशिरा (IV) द्रव, दर्द नियंत्रण, रक्त परीक्षण, रक्तस्राव की निगरानी, श्वसन सहायता (वेंटिलेशन) सहित अन्य आवश्यक उपचार भी उपलब्ध कराते हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने से अधिकांश मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार संभव है।जिलाधिकारी गौरांग राठी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए हैं कि जनपद के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी स्नेक वेनम (ASV), जीवनरक्षक दवाओं और प्रशिक्षित चिकित्सा टीम की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही आशा, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से गांव-गांव जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सर्पदंश से बचाव और वैज्ञानिक उपचार के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि सर्पदंश की किसी भी घटना में बिना समय गंवाए निकटतम सरकारी अस्पताल पहुंचें और केवल वैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय उपचार पर ही विश्वास करें। समय पर उपचार और सतर्कता किसी भी व्यक्ति का जीवन बचा सकती है।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here