
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार राज्य में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), उपग्रह तकनीक, ड्रोन, आईओटी सेंसर और डेटा एनालिटिक्स आधारित आधुनिक तकनीकों का उपयोग करेगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कृषि विभाग को निर्देश दिए हैं कि कपास, सोयाबीन, तूर, गन्ना, संतरा, हल्दी, प्याज और मक्का जैसी प्रमुख फसलों के लिए ‘एआई इन एग्रीकल्चर’ और ‘डिजिटल ट्विन लर्निंग’ परियोजना का पायलट चरण शुरू किया जाए। इसके तहत पहले चरण में राज्य के 10 हजार किसानों का चयन किया जाएगा। शुक्रवार को सह्याद्री अतिथिगृह में आयोजित बैठक में परियोजना की प्रस्तुति के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जल संकट, मिट्टी की घटती उर्वरता, कीट एवं रोगों का बढ़ता प्रकोप और बढ़ती उत्पादन लागत जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग आवश्यक है। उन्होंने बारामती के एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट ट्रस्ट द्वारा विकसित इस परियोजना का विभागवार और फसलवार अध्ययन करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के तहत फसलों की वृद्धि, मिट्टी की नमी, पानी की आवश्यकता, मौसम, कीट-रोगों की स्थिति और संभावित उत्पादन से जुड़ा डेटा एकीकृत डिजिटल प्रणाली के माध्यम से एकत्र किया जाएगा। मशीन लर्निंग आधारित विश्लेषण के जरिए किसानों को फसलवार और खेतवार सटीक सलाह उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि पहले चरण में सीमित फसलों और चयनित किसानों पर परियोजना लागू कर उसके परिणामों का आकलन किया जाए। सफल होने पर इसे पूरे महाराष्ट्र में व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि एआई आधारित सिंचाई प्रबंधन से पानी की बचत होगी, उत्पादन लागत घटेगी और अधिक से अधिक किसानों तक आधुनिक तकनीक का लाभ पहुंचाया जा सकेगा, जिससे वे आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनेंगे। बैठक में कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे, कृषि राज्यमंत्री एड. आशीष जायसवाल, सहकार राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर, मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अजीत जावकर, माइक्रोसॉफ्ट की सपना मोहरिया तथा कृषि एवं तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञ उपस्थित थे।

