
मुंबई। मुंबई की सेशंस कोर्ट ने कथित फर्जी VIP रेलवे टिकट घोटाले में गिरफ्तार 33 वर्षीय रेलवे टिकट एजेंट मोहम्मद तारिक खान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। आरोपी पर लोक-भवन कार्यालय के फर्जी लेटरहेड, स्टैम्प और सील का इस्तेमाल कर VIP कोटे से रेलवे टिकट कन्फर्म कराने का आरोप है। मामले की शिकायत लोक-भवन में कार्यरत असिस्टेंट विशाल शिंदे ने मालाबार हिल पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, 6 फरवरी को उन्हें लोक-भवन कार्यालय से जुड़े पर्सनल असिस्टेंट अभयसिंह देशमुख (IPS) के नाम, हस्ताक्षर और स्टैम्प वाले दो पत्र रेलवे आरक्षण सत्यापन के लिए प्राप्त हुए। जांच में दोनों पत्र फर्जी पाए गए। जांच के दौरान पुलिस ने मोहम्मद तारिक खान को गिरफ्तार किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी पहले रेलवे टिकट बुक करता था और बाद में फर्जी हस्ताक्षर कर लोक-भवन कार्यालय के नकली लेटरहेड तैयार करता था। इसके बाद इन दस्तावेजों के जरिए VIP कोटे से टिकट कन्फर्म कराए जाते थे। सरकारी वकील वीणा शेलार ने अदालत को बताया कि जांच में सामने आया है कि आरोपी और उसके सहयोगियों ने लोक-भवन कार्यालय सहित करीब 23 सरकारी कार्यालयों के फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल कर 400 से अधिक रेलवे टिकट VIP कोटे से कन्फर्म कराए। वहीं बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि मोहम्मद तारिक खान को केवल संदेह के आधार पर फंसाया गया है। उसका कहना था कि वह पिछले छह वर्षों से अधिकृत रेलवे टिकट एजेंट के रूप में कार्यरत है और उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी है। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी के रिहा होने पर सबूतों से छेड़छाड़, गवाहों को प्रभावित करने या फरार होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए जमानत याचिका खारिज की जाती है।

