
मुंबई। महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अब अनिवार्य होगा। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने मंगलवार को पत्रकार परिषद में बताया कि इस नियम का सख्ती से पालन 20 अगस्त से शुरू किया जाएगा। जिन चालकों को मराठी का व्यावहारिक ज्ञान नहीं होगा, उन्हें पहले एक महीने का नोटिस दिया जाएगा। इस अवधि में मराठी नहीं सीखने पर उनका बैच तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया जाएगा। इसके बाद भी यदि चालक जानबूझकर मराठी सीखने से इनकार करता है तो उसका बैच और ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। मंत्री सरनाईक ने बताया कि कोकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ की ओर से पिछले 105 दिनों से ‘हिंदुहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे मराठी भाषा अभियान’ चलाया गया। इस अभियान के तहत करीब 1 लाख 65 हजार 600 गैर-मराठी ऑटो-टैक्सी चालकों ने मराठी भाषा का प्रशिक्षण लिया। ठाणे के गडकरी रंगायतन में आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मंत्री उदय सामंत और वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री मधु मंगेश कर्णिक की उपस्थिति में प्रशिक्षित चालकों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। उन्होंने कहा कि वर्ष 1989 से ही महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चलाने के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य है। 12 अगस्त 2026 को संबंधित कानूनी प्रावधान लागू होने के बाद अब इस नियम को पूरी सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सभी राज्यों के लोगों का स्वागत करता है, लेकिन राज्य की भाषा और संस्कृति का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है। मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के बाद उसके प्रचार-प्रसार और संरक्षण के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि जो चालक यह कहेंगे कि वे मराठी नहीं सीखेंगे या नहीं बोलेंगे, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और उन्हें किसी प्रकार की अतिरिक्त मोहलत नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक करीब 9 लाख 65 हजार ऑटो-टैक्सी परमिट और बैच जारी किए जा चुके हैं। अब नए बैच और लाइसेंस जारी करने से पहले आरटीओ अधिकारी चालक से मराठी में बातचीत कर उसके व्यावहारिक ज्ञान की जांच करेंगे, जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। मराठी का संतोषजनक ज्ञान होने के बाद ही नया बैच जारी किया जाएगा। सरनाईक ने बताया कि ऑटो-टैक्सी परमिट और बैच हासिल करने के लिए फर्जी अधिवास प्रमाणपत्र इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें भी मिली हैं। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के महाराष्ट्र में 15 वर्ष से निवास की पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर जांच कराई जाएगी। इस अभियान की जिम्मेदारी अतिरिक्त परिवहन आयुक्त रवि गायकवाड़ को सौंपी गई है और अगले महीने के अंत तक इसकी रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि ऑटो-टैक्सी चालकों के कल्याण के लिए स्थापित आनंद दिघे महामंडल से अब तक 37 हजार से अधिक सदस्य जुड़ चुके हैं। महामंडल के माध्यम से विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए 57 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत विद्यार्थियों के लिए सहायता, 65 वर्ष की आयु पूरी करने वाले ऑटो-चालकों को 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता तथा गंभीर बीमारी के इलाज के लिए वित्तीय मदद जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

