
मुंबई: सिंधुदुर्ग जिले में पुनर्गठित मौसम आधारित फल फसल बीमा योजना के तहत तकनीकी खामियों के कारण मुआवजे से वंचित किसानों को तत्काल न्याय दिलाया जाए। किसानों के हित में किसी भी तकनीकी समस्या को बाधा नहीं बनने दिया जाएगा और पात्र किसानों को उनका हक का मुआवजा मिले, इसके लिए सभी संबंधित विभाग समन्वय और तेजी से काम करें, ये निर्देश मत्स्य व्यवसाय एवं बंदरगाह मंत्री तथा सिंधुदुर्ग के पालकमंत्री नितेश राणे ने संबंधित अधिकारियों को दिए।मंत्री राणे की अध्यक्षता में मंत्रालय में सिंधुदुर्ग जिले में फल फसल बीमा मुआवजे से जुड़े मुद्दों को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में महाराष्ट्र के कृषि आयुक्त सूरज मांढरे, सिंधुदुर्ग जिलाधिकारी तृप्ति धोडमिसे, जिला कृषि अधिकारी, सीएससी के प्रबंधक वैभव देशपांडे, भारतीय कृषि बीमा कंपनी के प्रबंधक अनिल कुंभारे, सिंधुदुर्ग जिला बैंक के अध्यक्ष मनीष दळवी, सिंधुदुर्ग के पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष सतीश सावंत सहित कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में वर्ष 2025-26 की पुनर्गठित मौसम आधारित फल फसल बीमा योजना की विस्तृत समीक्षा की गई।मंत्री राणे ने कहा कि मौसम में बदलाव और बढ़ते तापमान के कारण सिंधुदुर्ग जिले में आम और काजू की फसलों को नुकसान हुआ है। हालांकि, कुछ मामलों में तकनीकी रिकॉर्ड और दस्तावेजों में खामियों के कारण किसानों को बीमा मुआवजे का लाभ नहीं मिल सका है। इन सभी खामियों को तत्काल दूर कर पात्र किसानों को उनके हक का मुआवजा दिलाने के लिए प्राथमिकता से कार्रवाई की जाए। दस्तावेजों में कमियों के कारण जिन बीमा प्रस्तावों को रद्द किया गया है, उनकी पूर्ति कर उन्हें दोबारा सक्रिय किया जाए।उन्होंने मौसम केंद्रों से जुड़ी तकनीकी समस्याओं, राजस्व मंडल के रिकॉर्ड और बीमा दावों से संबंधित अड़चनों को दूर करने के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वय से काम करने के निर्देश दिए। सिंधुदुर्ग जिले में आम और काजू की फसल के नुकसान के संबंध में कुछ राजस्व मंडलों को तकनीकी रिकॉर्ड के अभाव में बीमा लाभ नहीं मिलने की शिकायतों पर भी प्राथमिकता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। साथ ही आजगांव राजस्व मंडल के स्वचालित मौसम केंद्र में तकनीकी खामियों के कारण किसानों को बेहद कम मुआवजा मिलने के मामले में भी आवश्यक उपाय करने को कहा गया।मंत्री राणे ने कहा कि संकट की घड़ी में सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और तकनीकी अड़चनों को दूर कर उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। फसल नुकसान के कारण किसान संकट में हैं। ऐसे कठिन समय में सरकार किसानों को हरसंभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए पात्र किसानों को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाए।

