Friday, March 13, 2026
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“दहेज मुक्त महाराष्ट्र, हिंसा मुक्त परिवार” – सुप्रिया सुले ने वैष्णवी हगावने आत्महत्या मामले के बाद राज्यव्यापी अभियान की घोषणा की

पुणे। 26 वर्षीय वैष्णवी हगावने की आत्महत्या के बाद, जिसमें दहेज उत्पीड़न के आरोप सामने आए हैं, पूरे महाराष्ट्र में आक्रोश फैल गया है। इस संदर्भ में एनसीपी (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले ने रविवार को एक वर्ष तक चलने वाले राज्यव्यापी अभियान की घोषणा की, जिसका उद्देश्य दहेज प्रथा और पारिवारिक हिंसा के खिलाफ जनजागरूकता फैलाना है। सुले ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह समाज में बदलाव लाने का समय है, केवल दुःख या आक्रोश जताने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने इस अभियान का नारा प्रस्तुत किया– “दहेज मुक्त महाराष्ट्र, हिंसा मुक्त परिवार। हमारी बेटियों के लिए, हम सभी द्वारा जागरूकता का आंदोलन।
वैष्णवी हगावने आत्महत्या मामला
पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवाड़ स्थित बावधन इलाके में रहने वाली वैष्णवी ने 16 मई को कथित तौर पर दहेज प्रताड़ना के चलते आत्महत्या कर ली। वह निष्कासित एनसीपी नेता राजेंद्र हगावने की बहू थी। पुणे पुलिस ने इस मामले में पहले ही वैष्णवी के पति शशांक हगवणे, सास लता और ननद करिश्मा को गिरफ्तार कर लिया था। अब सात दिन फरार रहने के बाद मुख्य आरोपी ससुर राजेंद्र हगवणे और देवर सुशील हगवणे को भी पुलिस ने शुक्रवार तड़के तलेगांव से गिरफ्तार कर लिया। बावधन पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(2), 108, 115(2), 352, 351(2), और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी गंभीरता से जांच शुरू की है। सुले ने वैष्णवी की मौत को महाराष्ट्र की छवि पर एक धब्बा बताते हुए कहा- हम जिस राज्य को महिलाओं की मुक्ति और सम्मान के लिए जानते हैं, वहां इस तरह की घटनाएं निंदनीय और शर्मनाक हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि दहेज प्रथा शिक्षित वर्ग में भी जिंदा है, जो समाज की दोहरी मानसिकता को दर्शाता है। सुले ने 22 जून से दहेज के खिलाफ चरणबद्ध राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की घोषणा की, जिसमें जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, विद्यार्थी, महिला समूह और आम नागरिकों की भागीदारी की अपील की गई है।
एक साल तक चलने वाला जागरूकता अभियान
स्कूल, कॉलेज, पंचायत और शहरी इलाकों में रैलियां, पोस्टर, वर्कशॉप्स और जनसंवाद। सुले ने कहा- हमारा लक्ष्य स्पष्ट है – दहेज और पारिवारिक हिंसा से मुक्त महाराष्ट्र का निर्माण। इसके लिए हर घर, हर मोहल्ले, हर गांव को साथ लाना होगा।

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