
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों और अन्य हितधारकों के साथ नियमित और व्यापक संवाद को बढ़ावा देने की पहल के तहत मंगलवार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष कु.मायावती के साथ संवाद बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा और पार्टी कोषाध्यक्ष श्रीधर भी उपस्थित थे। यह संवाद बैठक मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ.विवेक जोशी की उपस्थिति में निर्वाचन सदन में आयोजित की गई। आयोग ने यह पहल देश की चुनाव प्रक्रिया को मौजूदा कानूनी ढांचे के अंतर्गत अधिक पारदर्शी, समावेशी और सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की है। बैठक में बसपा प्रमुख मायावती ने चुनावों से पहले ओपिनियन पोल पर प्रतिबंध, ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने, और मतदाता सूची में सुधार की मांगें आयोग के समक्ष रखीं। आयोग के सूत्रों के अनुसार, यह पहली बार है जब किसी राजनीतिक दल के साथ इस प्रकार की औपचारिक और स्वतंत्र बातचीत की गई है, जिसमें दल प्रमुख ने सीधे सुझाव और चिंताएं आयोग तक पहुंचाई हैं। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी सूचना के अनुसार, यह पहल आयोग की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित कर चुनाव प्रणाली में सुधार हेतु सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं। चुनाव आयोग अब तक कुल 4,719 सर्वदलीय बैठकें आयोजित कर चुका है, जिनमें 40 मुख्य निर्वाचन अधिकारी, 800 जिला निर्वाचन अधिकारी, और 3,879 मतदाता पंजीकरण अधिकारी सम्मिलित रहे हैं। इन बैठकों में देशभर से 28,000 से अधिक राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भाग लेकर अपने विचार रखे हैं। गौरतलब है कि वर्तमान में चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त छह राष्ट्रीय राजनीतिक दल—भाजपा, कांग्रेस, बसपा, आम आदमी पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और नेशनल पीपुल्स पार्टी सक्रिय हैं, जबकि लगभग 50 क्षेत्रीय दलों को मान्यता प्राप्त है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह भविष्य में भी इसी प्रकार के संवादों के माध्यम से लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक सहभागी और उत्तरदायी बनाने के प्रयास जारी रखेगा।




