
मुंबई। भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कासकर को शुक्रवार को एक विशेष मकोका अदालत ने जबरन वसूली के मामले में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धाराएं 384, 386 और 387 तथा महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत लगाए गए आरोप कासकर के खिलाफ साबित नहीं हो सके। विशेष न्यायाधीश बीडी. शेलके ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष इकबाल कासकर के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश करने में असफल रहा। हालांकि, कासकर की जेल से तत्काल रिहाई संभव नहीं है क्योंकि उसके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग का मामला अभी लंबित है।
2015 का मामला: 30 लाख और चार फ्लैट की मांग का आरोप
यह मामला वर्ष 2015 का है, जब कासकर पर आरोप लगा था कि उसने ठाणे के एक रियल एस्टेट डेवलपर से 30 लाख रुपये नकद और चार फ्लैट की मांग की थी। पुलिस के अनुसार, धमकी भरे इस जबरन वसूली के प्रयास में एक फ्लैट एक सह-आरोपी (जो अब मृत है) के नाम पर रजिस्टर्ड भी कराया गया था। ठाणे के कासरवडावली पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में कासकर के साथ छोटा शकील को भी वांछित आरोपी के तौर पर नामजद किया गया है। माना जाता है कि छोटा शकील दाऊद इब्राहिम के करीबी सहयोगी हैं।
ईडी की जांच और मनी लॉन्ड्रिंग केस
साल 2022 में ईडी ने इकबाल कासकर से मुंबई और अन्य हिस्सों में दाऊद गिरोह की गतिविधियों के बारे में पूछताछ की थी। ईडी ने अप्रैल 2022 में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत आरोप पत्र भी दायर किया था, जिसमें मकोका और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के उल्लंघन का हवाला दिया गया था। जांच में सामने आया कि वसूली से प्राप्त धनराशि का इस्तेमाल लेन-देन को छिपाने और लाभार्थियों तक पहुंचाने में किया गया था।




