
मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने हाल ही में कैबिनेट द्वारा पारित जाति आधारित जनगणना के फैसले को “देर से लिया गया सही कदम” बताया, लेकिन साफ तौर पर इसका श्रेय कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दिया। राउत ने कहा कि भले ही घोषणा प्रधानमंत्री आवास पर हुई हो, लेकिन यह निर्णय राहुल गांधी द्वारा लगातार उठाए गए सवालों और दबाव का परिणाम है। उन्होंने राहुल की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा, “यह फैसला अगर आज आया है, तो इसकी नींव राहुल गांधी ने बहुत पहले रखी थी।” राउत ने यह भी आरोप लगाया कि यह निर्णय पहलगाम आतंकी हमले के बाद सरकार पर बढ़ते दबाव और आलोचना से ध्यान हटाने की रणनीति हो सकती है।
बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे चुनावी राज्यों का हवाला देते हुए राउत ने कहा कि जातिगत जनगणना अब एक जनभावना बन चुकी है और सरकार इसके खिलाफ अब और खड़ी नहीं रह सकती। उन्होंने भाजपा के नेताओं – खासतौर पर अनुराग ठाकुर – द्वारा पहले इस मुद्दे को खारिज किए जाने की याद दिलाई और कहा कि भाजपा का यह यू-टर्न राजनीतिक मजबूरी का संकेत है।
प्रेस वार्ता के दौरान राउत ने प्रधानमंत्री की पहलगाम हमले के बीच अचानक बिहार यात्रा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “जब देश पीड़ा में है, प्रधानमंत्री का बिहार दौरा असंवेदनशीलता दिखाता है।” उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि आतंकवाद से निपटने में गंभीरता की बजाय राजनीतिक लाभ पर ध्यान दिया जा रहा है। राउत ने महाराष्ट्र सरकार की कार्यशैली और प्रशासनिक दिशा पर भी निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की बेटी की शैक्षणिक उपलब्धि की सराहना की, लेकिन साथ ही कहा कि “जब राज्य शिक्षा, बेरोजगारी और किसान संकट से जूझ रहा हो, तब निजी उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करना जनता से कटाव का संकेत हो सकता है। राजनीतिक समीकरणों की बात करते हुए राउत ने शरद पवार के प्रति समर्थन व्यक्त किया और कहा कि वह एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच सहयोग की प्रक्रिया को जल्द शुरू होते देखना चाहते हैं। उन्होंने संकेत दिए कि आगामी चुनावों को लेकर गठबंधन के नए समीकरण जल्दी तय हो सकते हैं।




