
मुंबई। राज्य के प्रत्येक बच्चे तक स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाने तथा उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार राज्यभर में ‘बालस्नेही ग्राम पंचायत’ और ‘बालस्नेही प्रभाग’ (बाल हितैषी वार्ड) की नई पहल शुरू करेगी। इसकी घोषणा महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने की। सोमवार को मंत्रालय में आयोजित राज्य बाल अधिकार आयोग की समीक्षा बैठक में मंत्री तटकरे ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, नैतिक मूल्यों और जीवन कौशल के विकास के लिए तैयार की गई ‘मानस’ पुस्तिका का विमोचन किया। साथ ही पालघर जिले के 50 स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किए जा रहे ‘मानस’ अभियान के तहत विद्यार्थियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य किट का भी शुभारंभ किया। आदिती तटकरे ने बताया कि 5 सितंबर से 14 नवंबर तक ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर ‘बालस्नेही ग्राम पंचायत’ और ‘बालस्नेही प्रभाग’ की अवधारणा को लागू किया जाएगा। इसके माध्यम से बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा तंत्र और सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उनके समग्र विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत गंभीर कुपोषण उन्मूलन, बाल विवाह रोकथाम, एकीकृत बाल संरक्षण योजना, पोषण, शिक्षा और बाल सुरक्षा जैसे विषयों पर ग्राम पंचायतों के माध्यम से विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे। साथ ही बाल सुरक्षा समितियों का गठन, बाल संसद, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) और पोषण ट्रैकर रिपोर्ट के आधार पर बच्चों में कुपोषण, कम वजन और बढ़ते मोटापे जैसी समस्याओं का अध्ययन भी किया जाएगा। मंत्री ने निर्देश दिए कि आदिवासी क्षेत्रों की लगभग 500 सरकारी और 500 निजी आश्रमशालाओं में अध्ययनरत करीब 5 लाख विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए इस योजना के लिए मानक कार्यप्रणाली तैयार की जाए। वहीं शहरी क्षेत्रों में नगर विकास विभाग के समन्वय से आवश्यकता वाले क्षेत्रों में नए आंगनवाड़ी केंद्र शुरू करने की दिशा में भी कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि बाल पंचायतों के माध्यम से बच्चों को शिक्षा का अधिकार (आरटीई), बाल अधिकार, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन तथा विभिन्न सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी व्यावहारिक तरीके से दी जाएगी। साथ ही प्रत्येक बालस्नेही ग्राम पंचायत में वर्षभर के दौरान सामने आई समस्याओं, उनके समाधान और सुधारों की नियमित समीक्षा कर उसकी रिपोर्ट ग्रामसभा में प्रस्तुत करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। मंत्री तटकरे ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘बालस्नेही ग्राम पंचायत’ और ‘बालस्नेही प्रभाग’ जैसी पहल राज्य के 0 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के सुरक्षित, स्वस्थ और सशक्त भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

