
मुंबई। महाराष्ट्र में सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निर्देश दिए हैं कि राज्य परिवहन (एसटी) की ई-बस परियोजना को गति दी जाए और बसों के लिए आवश्यक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना का कार्य तेजी से पूरा किया जाए। सोमवार को वर्षा निवास में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘विकसित महाराष्ट्र’ की परिकल्पना के तहत वर्ष 2029 तक एसटी के कुल बेड़े का 50 प्रतिशत, वर्ष 2035 तक 80 प्रतिशत और वर्ष 2047 तक 100 प्रतिशत बेड़ा ई-बसों में परिवर्तित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।बैठक में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक, एसटी महामंडल के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. माधव कुसेकर सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन मार्गों पर ई-बसें संचालित की जानी हैं, उनका कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक के माध्यम से अध्ययन किया जाए। साथ ही बसों की आपूर्ति होते ही सात दिनों के भीतर उनका निरीक्षण पूरा किया जाए और ई-बस संचालन के लिए एक समग्र इकोसिस्टम विकसित किया जाए।उन्होंने कहा कि जिन मार्गों पर निजी बस सेवाएं संचालित हो रही हैं, उनका भी अध्ययन कर वहां ई-बसों के संचालन की संभावनाएं तैयार रखी जाएं, ताकि यात्रियों को बेहतर और प्रदूषण-मुक्त विकल्प उपलब्ध कराया जा सके।राज्य सरकार की ई-वाहन नीति के तहत सार्वजनिक परिवहन में ई-बसों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। नीति के अनुसार 1,500 ई-बसों के लिए प्रति बस लागत का 10 प्रतिशत अथवा अधिकतम 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।वर्तमान में महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल पर 5,150 ई-बसों की महत्वाकांक्षी परियोजना पर कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से राज्य के यात्रियों को आधुनिक, आरामदायक, सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी तथा महाराष्ट्र हरित परिवहन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।



