
नागपुर। राज्य के पूर्व गृह मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख ने मंगलवार को एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में नागपुर जिले में फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाले का खुलासा करते हुए इसे व्यापम घोटाले से भी बड़ा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घोटाले के तहत प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपये लेकर फर्जी नियुक्तियां की गईं, जिससे हजारों करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। देशमुख ने दावा किया कि नागपुर जिले में कम से कम 1058 शिक्षक फर्जी तरीके से नियुक्त किए गए हैं। कई शिक्षकों को यह तक नहीं पता कि उन्हें किस स्कूल में नियुक्त किया गया है। इस पूरे मामले की सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से जांच कराई जानी चाहिए, उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इसे गंभीरता से क्यों नहीं ले रहे, जबकि यह मामला फडणवीस के अपने गृह जिले से जुड़ा है।
शरद-अजित पुनर्मिलन पर अनिल देशमुख ने किया इनकार
राज्य की राजनीति में इन दिनों शरद पवार और अजित पवार के संभावित पुनर्मिलन को लेकर चर्चा तेज है। हालांकि अनिल देशमुख ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि “ऐसी कोई बातचीत वरिष्ठ स्तर पर नहीं चल रही है। यह केवल मीडिया की अटकलें हैं। यदि ऐसा कुछ होगा, तो आधिकारिक तौर पर घोषणा की जाएगी। वहीं, सामाजिक न्याय मंत्री और शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता संजय शिरसाट ने इन अटकलों को हवा देते हुए कहा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में विभाजन एक पारिवारिक मामला है, और पुनर्मिलन की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल और तेज हो गई है। शिरसाट ने यह भी कहा कि शिवसेना (उद्धव गुट) का कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन करना शुरू से ही गलत था और अब उद्धव ठाकरे को इसका अहसास हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि एनसीपी के कई सदस्य उद्धव गुट के साथ नहीं टिक पाएंगे और उनका भविष्य अब अनिश्चित है।



