
नवी मुंबई (इंद्र यादव)। नवी मुंबई महानगरपालिका (NMMC) के प्रशासनिक तंत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने मुख्यालय की तीसरी मंजिल पर अचानक छापा मारकर अतिक्रमण विभाग के उपायुक्त कैलास गायकवाड को 42 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद की गई, जिसमें आरोप था कि गायकवाड ने ठेकेदार के लंबित बिल को पास करने के बदले ‘कमीशन’ की मांग की थी। जानकारी के अनुसार, ठेकेदार दशरथ सुरवते ने 15 नवंबर 2024 से 15 फरवरी 2025 के बीच ऐरोली जोन में अतिक्रमण विरोधी अभियान के लिए मशीनरी और श्रमिक उपलब्ध कराए थे, लेकिन भुगतान लंबे समय से अटका हुआ था। आरोप है कि उपायुक्त ने फाइल को आगे बढ़ाने और चेक जारी करने के लिए रिश्वत की मांग की, जिससे परेशान होकर ठेकेदार ने ACB से संपर्क किया। शिकायत की पुष्टि के बाद ACB की ठाणे इकाई ने जाल बिछाया और तय योजना के तहत जैसे ही ठेकेदार ने गायकवाड के केबिन में पैसे सौंपे, सादे कपड़ों में मौजूद अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया। इस दौरान मुख्यालय में नियमित कामकाज जारी था, लेकिन तीसरी मंजिल पर हुई इस अचानक कार्रवाई से कर्मचारियों और अधिकारियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गिरफ्तारी के बाद ACB ने आरोपी के कार्यालय की तलाशी लेकर कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं, और अब उनके कार्यकाल में स्वीकृत अन्य ठेकों व फाइलों की भी जांच की जा सकती है। साथ ही, नियमानुसार उनके आवासीय परिसरों की तलाशी लेकर संभावित अवैध संपत्ति की जांच भी की जाएगी। राज्य के अपेक्षाकृत पारदर्शी माने जाने वाले नगर निगमों में शामिल NMMC में एक वरिष्ठ ‘क्लास-1’ अधिकारी का इस तरह रिश्वत लेते पकड़ा जाना प्रशासनिक साख पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोपी कैलास गायकवाड के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और फिलहाल वह पुलिस हिरासत में हैं, जहां उनसे पूछताछ जारी है। यह कार्रवाई न केवल इस मामले तक सीमित है, बल्कि उन सभी अधिकारियों के लिए सख्त चेतावनी के रूप में देखी जा रही है, जो सार्वजनिक धन और ठेकों के भुगतान में अवैध वसूली के खेल में लिप्त हैं।




