
अदालत ने कहा- सराहनीय काम कर रहा एफ़डीए, लेकिन हद से आगे बढ़ना और मनमानी स्वीकार नहीं
मुंबई। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषध प्रशासन (एफ़डीए) ने शनिवार को सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड की पुणे यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने संबंधी अपना आदेश वापस ले लिया। बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा राज्य के औषधि नियामक को कथित तौर पर हद से आगे बढ़कर कार्रवाई करने और कंपनी को सुनवाई का पर्याप्त अवसर नहीं देने पर कड़ी फटकार लगाए जाने के बाद एफ़डीए ने यह कदम उठाया। एफ़डीए ने इससे पहले पुणे के वाडकी स्थित सिप्ला की कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग (C&F) सुविधा के दवा बिक्री लाइसेंस को 27 अगस्त से तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया था। यह कार्रवाई ‘रिएक्टिन प्लस टैबलेट्स’ की पैकेजिंग पर कथित रूप से अनुमति के बिना ‘एनाल्जेसिक और एंटीपायरेटिक’ लिखे जाने तथा बाद की जांच में दवाओं के भंडारण, खरीद-बिक्री रिकॉर्ड, वास्तविक और कम्प्यूटरीकृत स्टॉक में अंतर, रिकॉल संबंधी निर्देशों के अनुपालन और एक्सपायर्ड दवाओं के प्रबंधन से जुड़ी अनियमितताएं सामने आने के आधार पर की गई थी। सिप्ला ने एफ़डीए की कार्रवाई को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान एफ़डीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्रवाई में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाना आवश्यक था। सिप्ला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने अदालत को बताया कि एफ़डीए ने कंपनी को ई-मेल भेजकर 26 अगस्त को विभाग के समक्ष सुनवाई के लिए उपस्थित होने को कहा था, जबकि उस दिन सार्वजनिक अवकाश था। कंपनी का कोई प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं होने के कारण सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन इसके बावजूद कथित तौर पर कंपनी को सुनवाई का अवसर दिए बिना आदेश जारी कर दिया गया। एफ़डीए की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील पी. पी. काकड़े ने दलील दी कि संबंधित कानून के तहत कंपनी को सुनवाई का अधिकार नहीं है। इस पर पीठ ने सवाल किया कि यदि सुनवाई का अधिकार ही नहीं था तो विभाग ने कंपनी को ई-मेल भेजकर प्रतिनिधि को सुनवाई के लिए उपस्थित होने को क्यों कहा, वह भी उस दिन जब राज्य सरकार ने सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। अदालत ने एफ़डीए की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विभाग बहुत अच्छा और सराहनीय काम कर रहा है, लेकिन उसे अपनी सीमा से आगे नहीं बढ़ना चाहिए। पीठ ने टिप्पणी की कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है और इस मामले में विभाग से गलती हुई है, जिसे उसे स्वयं सुधारना होगा। इसके बाद एफ़डीए ने सिप्ला की पुणे यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने का आदेश वापस ले लिया। वहीं सिप्ला ने स्पष्ट किया कि एफ़डीए के आदेश में उसके उत्पादों की सुरक्षा, गुणवत्ता या प्रभावशीलता को लेकर कोई चिंता नहीं जताई गई थी और न ही मरीजों की सुरक्षा से संबंधित किसी समस्या का उल्लेख किया गया था।

