
ग्रामीण अस्पताल से जिला अस्पताल तक डॉक्टर, जांच, दवाएं और सेवाओं के मानक निर्धारित
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और समयबद्ध बनाने के लिए अस्पतालवार व्यापक सेवा मानक तय किए हैं। रविवार को सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने बताया कि ग्रामीण अस्पताल से लेकर उपजिला, सामान्य और जिला अस्पताल तक प्रत्येक स्तर पर उपलब्ध कराई जाने वाली चिकित्सा सुविधाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों, जांच, दवाओं, मानव संसाधन और अन्य सेवाओं के लिए स्पष्ट मानक निर्धारित किए गए हैं। मंत्री ने कहा कि इस निर्णय से सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं अधिक व्यवस्थित और प्रभावी होंगी। नागरिकों को अपनी आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त अस्पताल का चयन करना आसान होगा तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ेगा।
अस्पतालों की क्षमता के अनुसार तय होंगी सुविधाएं
नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण अस्पतालों, 30, 50 और 100 बेड वाले उपजिला अस्पतालों, सामान्य अस्पतालों तथा जिला अस्पतालों के लिए अलग-अलग सेवा मानक निर्धारित किए गए हैं। अस्पताल की क्षमता के अनुरूप विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मी, प्रयोगशाला, रेडियोलॉजी और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इन अस्पतालों में फिजिशियन, सर्जन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, अस्थि रोग विशेषज्ञ, नेत्र विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट और दंत चिकित्सकों जैसी सेवाएं अस्पताल के स्तर के अनुसार उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे मरीजों को इलाज के लिए दूर के शहरों में जाने की आवश्यकता कम होगी।
308 प्रकार की जांच की सुविधा
सरकार ने विभिन्न स्तर के अस्पतालों में उपलब्ध कराई जाने वाली जांच सुविधाओं के भी मानक तय किए हैं। ग्रामीण अस्पतालों में 76, 100 बेड वाले उपजिला अस्पतालों में 110 तथा जिला अस्पतालों में 122 प्रकार की जांच उपलब्ध कराई जाएगी। इस प्रकार कुल 308 प्रकार की डायग्नोस्टिक जांचों को मानकीकृत किया गया है। इनमें ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन, विभिन्न रक्त जांच, लीवर और किडनी फंक्शन टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, HbA1C, थायरॉयड जांच, पैप स्मीयर और विभिन्न संक्रामक रोगों की जांच शामिल हैं।
एक्स-रे से एमआरआई तक आधुनिक जांच सुविधा
नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों के स्तर के अनुसार एक्स-रे और सोनोग्राफी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। 100 बेड से अधिक क्षमता वाले अस्पतालों में सीटी स्कैन तथा जिला अस्पतालों में एमआरआई सुविधा के मानक भी निर्धारित किए गए हैं। इससे गंभीर बीमारियों का तेजी और सटीकता से निदान संभव होगा।
प्रशिक्षित मानव संसाधन को मिलेगा बढ़ावा
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी। इसमें लैब तकनीशियन, ईसीजी तकनीशियन, एक्स-रे तकनीशियन, ब्लड बैंक कर्मी, आहार विशेषज्ञ, फिजियोथेरेपिस्ट, मेडिकल सोशल वर्कर और मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से भी अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध कराया गया है, जिसमें 111 सुपर स्पेशलिस्ट, 1,519 विशेषज्ञ चिकित्सक, 2,919 चिकित्सा अधिकारी, 3,005 आयुष चिकित्सा अधिकारी और 11,571 स्टाफ नर्स शामिल हैं।
दवाएं, डायलिसिस और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
सरकार ने अस्पतालों के स्तर के अनुसार आवश्यक दवाओं की सूची और दवा भंडारण के मानक भी निर्धारित किए हैं। इसके अलावा ब्लड बैंक, रक्त संक्रमण केंद्र, डायलिसिस, आयुष सेवाएं, टीकाकरण कक्ष, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं तथा प्रसूति कक्ष जैसी सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी गई है। साथ ही एंबुलेंस सेवा, दिव्यांग प्रमाणपत्र, मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र, डिस्चार्ज सर्टिफिकेट, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, जननी सुरक्षा योजना, मरीजों के भोजन और शिकायत निवारण जैसी नागरिक सुविधाओं को भी व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा कि नई व्यवस्था से नागरिकों को पहले से स्पष्ट जानकारी होगी कि किस अस्पताल में कौन-कौन सी स्वास्थ्य सेवाएं, विशेषज्ञ डॉक्टर और जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।

