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मुंबई में QR कोड से होगी आवारा कुत्तों की पहचान, बीएमसी की नई पहल

मुंबई। मुंबई में अब QR कोड से होगी आवारा कुत्तों की पहचान, बीएमसी ने शुरू की हाईटेक व्यवस्थामुंबई : बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने शहर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब रेबीज रोधी टीकाकरण और नसबंदी करा चुके आवारा कुत्तों की पहचान QR कोड युक्त रिफ्लेक्टिव (Reflective) कॉलर के माध्यम से की जाएगी। इस तकनीक से कुत्तों की मौके पर ही पहचान, उनका डिजिटल रिकॉर्ड और ट्रैकिंग आसान हो जाएगी। यह पहल सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिड़े के मार्गदर्शन तथा अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे के नेतृत्व में शुरू की गई है। इस परियोजना के तहत बीएमसी और रिडलान एआई फाउंडेशन के बीच मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय में समझौता (एमओयू) किया गया। इस अवसर पर उपायुक्त (विशेष) विनायक विसपुते, पशु चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख डॉ. कलीमपाशा पठान, रिडलान एआई फाउंडेशन के अक्षय रिडलान सहित पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। बीएमसी अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक कॉलर पर एक विशिष्ट QR कोड होगा, जिसे स्कैन करते ही संबंधित आवारा कुत्ते की पूरी जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। इसमें उसके रेबीज टीकाकरण, नसबंदी, स्वास्थ्य स्थिति और अन्य आवश्यक विवरण डिजिटल रूप से दर्ज रहेंगे। इससे यह तुरंत पता चल सकेगा कि संबंधित कुत्ते का टीकाकरण और नसबंदी हो चुकी है या नहीं।महानगरपालिका का कहना है कि इस तकनीक से आवारा कुत्तों के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी, दोबारा टीकाकरण या नसबंदी जैसी अनावश्यक प्रक्रियाओं से बचा जा सकेगा और रेबीज नियंत्रण अभियान को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। साथ ही कुत्तों की निगरानी, उनकी पहचान और रिकॉर्ड प्रबंधन पूरी तरह डिजिटल होने से पशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार आएगा। बीएमसी का मानना है कि यह तकनीक आधारित पहल मुंबई में आवारा कुत्तों के वैज्ञानिक प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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