
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य को वर्ष 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नए राजस्व स्रोत विकसित करने पर जोर देते हुए भूमि और अचल संपत्तियों के ‘सुप्त मूल्य’ (Latent Value) का सार्वजनिक हित में उपयोग करने के उद्देश्य से ‘डेल्टा’ (महाराष्ट्र डिजिटाइजेशन एंड एक्सचेंज ऑफ लैंड टोकन एसेट्स) कानून लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह कानून संपत्तियों की छिपी हुई आर्थिक क्षमता को उपयोग में लाने वाला होना चाहिए। सोमवार को सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने डेल्टा कानून के मसौदे की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि इस कानून को व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए सेबी, बीएसई, एनएसई तथा इस क्षेत्र के विशेषज्ञों और अनुभवी व्यक्तियों को शामिल कर एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाए, ताकि सभी पक्षों को ध्यान में रखकर कानून तैयार किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में दुनिया भर में ब्लॉकचेन तकनीक के माध्यम से अचल संपत्तियों का टोकनाइजेशन कर उनकी आर्थिक उपयोगिता और मूल्य बढ़ाया जाएगा। महाराष्ट्र इस दिशा में कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बनने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के विकसित देशों में लागू नियमों और प्रणालियों का अध्ययन कर महाराष्ट्र का कानून तैयार किया जाए, ताकि यह पूरे देश के लिए मार्गदर्शक बन सके। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल होगी। ब्लॉकचेन आधारित प्रणाली के माध्यम से जमीन और अन्य अचल संपत्तियों के मूल्य के अनुरूप टोकन जारी किए जाएंगे, जिससे खरीद-बिक्री और अन्य वित्तीय लेनदेन अधिक तेज, पारदर्शी और सुरक्षित होंगे। साथ ही ऐसे सभी लेनदेन को कानूनी संरक्षण भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि वर्तमान में संपत्ति की खरीद-बिक्री और बैंक ऋण के लिए गिरवी रखने जैसी प्रक्रियाएं समय लेने वाली हैं। यदि इन्हें डिजिटल टोकनाइजेशन प्रणाली में बदला जाता है तो लेनदेन अधिक सरल और गतिशील होंगे तथा संपत्ति मालिक अपनी संपत्ति के सुप्त आर्थिक मूल्य का बेहतर लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने नगर विकास, विधि एवं न्याय विभाग को इस कानून की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से राज्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा, संपत्ति लेनदेन अधिक पारदर्शी होंगे और सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी। बैठक में मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, अपर मुख्य सचिव (वित्त) ओ. पी. गुप्ता, अपर मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खारगे, प्रधान सचिव (विधि एवं न्याय) दिलीप घुमरे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

