
मुंबई। पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने चंद्रपुर और यवतमाल जिलों में कोयला खदानों तथा कोल वॉशरियों से बढ़ रहे वायु और जल प्रदूषण पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अधिकारियों और उद्योगों को अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल बैठकों और चर्चाओं तक सीमित रहने के बजाय तीन चरणों में तैयार कार्ययोजना को जमीनी स्तर पर लागू किया जाए। सोमवार को मुंबई में आयोजित बैठक में चंद्रपुर और यवतमाल के उद्योगपतियों, कोयला खदान एवं कोल वॉशरी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ प्रदूषण की वर्तमान स्थिति और नियंत्रण उपायों की समीक्षा की गई। इस दौरान महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव राहुल रेखावार ने प्रदूषण के प्रमुख कारणों और नियंत्रण के लिए प्रस्तावित उपायों का प्रस्तुतीकरण किया। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि चंद्रपुर और यवतमाल में प्रदूषण के प्रमुख स्रोत कोयला खदानें, कोल वॉशरियां और कोयले का सड़क मार्ग से परिवहन हैं। विशेष रूप से कोयला ढोने वाले वाहनों से धूल प्रदूषण बढ़ रहा है। इसे कम करने के लिए भविष्य में सड़क परिवहन के बजाय रेलमार्ग, कन्वेयर बेल्ट और कवर कन्वेयर सिस्टम के उपयोग को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने सभी उद्योगों को निर्देश दिया कि वे अगले तीन महीनों में लागू की जाने वाली अल्पकालिक प्रदूषण नियंत्रण उपायों का विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करें। इस योजना में वृक्षारोपण, धूल नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, जनजागरूकता अभियान तथा प्रदूषण कम करने के अन्य ठोस उपाय शामिल किए जाएं। मंत्री मुंडे ने कोयला खदानों और कोल वॉशरियों के आसपास बफर जोन विकसित करने पर भी जोर दिया, ताकि आसपास रहने वाले लोगों पर प्रदूषण का प्रभाव कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि उद्योगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभानी होगी और सीएसआर निधि का उपयोग वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि चंद्रपुर और यवतमाल का औद्योगिक विकास महत्वपूर्ण है, लेकिन नागरिकों का स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण उससे भी अधिक प्राथमिकता है। प्रदूषण नियंत्रण के नियमों के पालन में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने से पहले और बाद की स्थिति का फोटोग्राफ एवं अन्य माध्यमों से रिकॉर्ड रखा जाए, ताकि उनके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सके। बैठक में वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) ने जानकारी दी कि कंपनी लगभग 400 हेक्टेयर क्षेत्र में दो लाख पौधे लगाएगी। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण के लिए तीन स्तरीय रणनीति पर भी चर्चा हुई। इसके तहत अल्पकालिक उपायों में धूल नियंत्रण और परिवहन व्यवस्था में सुधार, मध्यमकालिक उपायों में ईटीपी-एसटीपी, अपशिष्ट प्रबंधन और हरित पट्टियों का विस्तार तथा दीर्घकालिक उपायों में स्वच्छ तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ जैसी प्रणालियों को अपनाने पर जोर दिया गया।

