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भारत-जापान संबंधों को और मजबूत करने की आवश्यकता : विधान परिषद सभापति राम शिंदे

मुंबई। महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने कहा कि भारत और जापान के बीच आर्थिक, तकनीकी और सामरिक सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति में जापान जैसे देशों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मंगलवार को विधान भवन में जापान की वाणिज्यदूत साटो हितोमी ने सभापति राम शिंदे से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर जापान के उप-वाणिज्यदूत निशिओ र्यो, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी स्वप्नील थोरात, विधानमंडल सचिव जितेंद्र भोळे, मेघना तळेकर, शिवदर्शन साठ्ये तथा सभापति के सचिव पंडित खेडकर उपस्थित थे। बैठक के दौरान राम शिंदे ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान के पुनर्निर्माण और विकास का उल्लेख करते हुए उसकी प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और राज्य में निवेश, उद्योग तथा रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए जापानी सहयोग का स्वागत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत और जापान के मैत्रीपूर्ण संबंध आने वाले समय में और अधिक मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि आधारभूत संरचना, उद्योग और विकास परियोजनाओं में जापान का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। ‘विकसित भारत 2047’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र में विकासोन्मुख नीतियों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। महाराष्ट्र में निवेश की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अहिल्यानगर जिले के सुपा एमआईडीसी क्षेत्र में जापानी कंपनियों ने 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महाराष्ट्र का महत्वपूर्ण योगदान है। मुंबई मेट्रो परियोजनाओं के लिए जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) द्वारा दिए गए सहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे भारत-जापान संबंध और मजबूत हुए हैं।
भारत की प्रगति में जापान सहयोग के लिए सदैव तत्पर : साटो हितोमी
जापान की वाणिज्यदूत साटो हितोमी ने कहा कि भारत और जापान के बीच व्यापार, निवेश, आर्थिक विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना दोनों देशों के संबंधों को और सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत में कार्य करने का उन्हें लंबा अनुभव रहा है और मुंबई में कार्य करने का अवसर मिलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हुआ है और उद्योग, तकनीक, शिक्षा तथा जन-जन के संवाद के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ी है। साटो हितोमी ने कहा कि भारत के विकास की यात्रा में जापान हमेशा सहयोग के लिए तैयार रहेगा और भविष्य में दोनों देशों के बीच मित्रता तथा आर्थिक संबंध और अधिक सशक्त होंगे। बैठक के अंत में सभापति राम शिंदे ने साटो हितोमी का शाल, पुष्पगुच्छ, स्मृति चिन्ह तथा ‘लोकसेवेचा लोकजागर’ ग्रंथ भेंट कर स्वागत किया।

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