Friday, April 24, 2026
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गुवाहाटी कोर्ट का फैसला: पवन खेड़ा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट की मांग खारिज

गुवाहाटी, असम। गुवाहाटी की एक अदालत ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने की असम पुलिस की याचिका खारिज कर दी है। यह मामला हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा है। यह आदेश कामरूप मेट्रो के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) द्वारा 7 अप्रैल को पारित किया गया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी करने के लिए दिए गए आधार “पूरी तरह से अनुमान और अटकलों पर आधारित हैं” और उन्हें रिकॉर्ड में मौजूद किसी ठोस साक्ष्य का समर्थन नहीं मिला। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि मामला संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध से जुड़ा है, इसलिए जांच अधिकारी के पास पहले से ही भारतीय न्याय संहिता (बीएनएसएस) की धारा 35 के तहत आवश्यकतानुसार गिरफ्तारी करने का अधिकार है। ऐसे में गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग इस स्तर पर उचित नहीं ठहराई जा सकती। गौरतलब है कि गुवाहाटी अपराध शाखा पुलिस में पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 175 और 318 सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। यह शिकायत 6 अप्रैल को रिनिकी भुयान सरमा द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि खेड़ा द्वारा लगाए गए आरोप झूठे और निराधार हैं। दरअसल, खेड़ा ने 5 अप्रैल को नई दिल्ली और गुवाहाटी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिनिकी भुयान सरमा पर कई पासपोर्ट/गोल्डन कार्ड और विदेशों में संपत्ति रखने का आरोप लगाया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, ये सभी दस्तावेज “फर्जी, छेड़छाड़ किए गए और गढ़े हुए” हैं, जिनका उद्देश्य सार्वजनिक भ्रम और अशांति फैलाना था। इस बीच, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 10 अप्रैल को पवन खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी। हालांकि बाद में उच्चतम न्यायालय ने असम सरकार की याचिका पर इस आदेश पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 20 अप्रैल तक गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की थी। साथ ही, अदालत ने उन्हें निर्देश दिया कि वे अग्रिम जमानत के लिए असम की सक्षम अदालत में आवेदन करें और स्पष्ट किया कि वहां की अदालत इस मामले की सुनवाई स्वतंत्र रूप से करेगी।

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