Wednesday, April 22, 2026
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भारत पहुंचे दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग, भव्य स्वागत, द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने पर जोर

नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग का सोमवार को राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत किया गया। इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे। राष्ट्रपति ली के साथ प्रथम महिला किम हेा क्यूंग भी भारत दौरे पर आई हैं। औपचारिक स्वागत के बाद राष्ट्रपति ली राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। रविवार को तीन दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे ली जे-म्युंग ने यहां कोरियाई समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की और कहा कि भारत-कोरिया शिखर सम्मेलन द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह बैठक दोनों देशों के रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकती है। राष्ट्रपति ली ने भारत की वैश्विक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारत अब केवल उपभोक्ता बाजार नहीं रहा, बल्कि वैश्विक उत्पादन और सप्लाई चेन को दिशा देने वाला प्रमुख देश बन चुका है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा भारत-दक्षिण कोरिया के “विशेष रणनीतिक साझेदारी” को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। राष्ट्रपति ली, जिन्होंने जून 2025 में पदभार संभाला, ने अपने दौरे की शुरुआत विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के साथ की। इस दौरे का मुख्य आकर्षण हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ली के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता है। इस बैठक में सेमीकंडक्टर, रक्षा निर्माण और हरित ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए “कम्प्रीहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA)” पर भी विचार-विमर्श होगा। बैठक के बाद दोनों पक्ष संयुक्त बयान जारी करेंगे, जिसमें भविष्य की साझेदारी की दिशा तय की जाएगी। आर्थिक दृष्टि से भी यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रपति ली भारत मंडपम में आयोजित एक बिजनेस फोरम में भाग लेंगे और बाद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। गौरतलब है कि वर्ष 2015 में भारत और दक्षिण कोरिया के संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया गया था, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचा, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है।

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