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हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: माइनिंग अधिकारी की रिपोर्ट पर आंख मूंदकर फैसला लेना दुर्भाग्यपूर्ण

जबलपुर। हाईकोर्ट ने एक माइनिंग मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ, जिसमें जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल शामिल थे, ने अपने आदेश में कहा कि माइनिंग अधिकारी द्वारा प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट को कलेक्टर द्वारा बिना विचार किए स्वीकार करना “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” है। न्यायालय ने यह भी कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए ही मामलों का निराकरण किया जाना चाहिए। यह मामला अवैध खनन परिवहन से जुड़ा है, जिसमें छिंदवाड़ा निवासी सारंग रघुवंशी द्वारा याचिका दायर की गई थी। याचिका में कलेक्टर द्वारा लगाए गए जुर्माने को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, चौरई के माइनिंग अधिकारी ने एक ट्रक को अवैध खनिज परिवहन के आरोप में जब्त किया था। पूछताछ के दौरान चालक ने ट्रक का मालिक याचिकाकर्ता को बताया, जिसके आधार पर खनन निरीक्षक ने पंचनामा तैयार कर दस्तावेज कलेक्टर को भेज दिए। इसके बाद याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। याचिकाकर्ता ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि वह ट्रक का मालिक नहीं है। अदालत को बताया गया कि जब्त ट्रक (क्रमांक RJ 14 GE 8519) का पंजीकरण बलवीर सिंह पुत्र सुगद सिंह के नाम पर है, जिसकी वैधता 18 दिसंबर 2027 तक है। इसके बावजूद कलेक्टर ने बिना तथ्यों की उचित जांच किए याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगा दिया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि माइनिंग अधिकारी को ट्रक के वास्तविक पंजीकृत मालिक का बयान दर्ज करना चाहिए था। बिना पर्याप्त जांच के याचिकाकर्ता को वाहन मालिक मान लेना पूरी तरह से लापरवाही और तकनीकी त्रुटि को दर्शाता है। युगलपीठ ने इस गंभीर टिप्पणी के साथ कलेक्टर द्वारा पारित आदेश को निरस्त कर दिया और जिला कलेक्टर व माइनिंग अधिकारी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

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