
मुंबई। अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों के विलय को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। शरद पवार गुट के नेताओं का दावा है कि अजित पवार ने शरद पवार के साथ एकजुट होने का निर्णय लिया था और 12 फरवरी को दोनों राष्ट्रवादी दलों के विलय की घोषणा होने वाली थी। हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन दावों को खारिज करते हुए शरद पवार गुट पर तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि यदि अजित पवार इस तरह की कोई चर्चा कर रहे थे, तो क्या वह एनडीए से बाहर निकलने की तैयारी कर रहे थे? क्या वह सरकार से बाहर जाने वाले थे? उन्होंने कहा कि अजित पवार सरकार में पूरी तरह स्थिर और सक्रिय थे। ऐसे में रोज नई अफवाहें फैलाना और अपनी इकोसिस्टम के जरिए उन्हें हवा देना अनुचित है।
फडणवीस ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि अजित पवार के निधन से एक दिन पहले वे उनके साथ करीब एक घंटे तक बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में वे राजनीति नहीं करना चाहते, अन्यथा वे कई बातें सार्वजनिक कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे कई घटनाओं के साक्षी रहे हैं और अजित पवार के साथ उनके संबंध बेहद अच्छे थे। अजित पवार लगभग हर अहम बात उनके साथ साझा करते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अजित पवार के निधन के बाद उनके दल ने संगठनात्मक निर्णय लिया है। आज राष्ट्रवादी कांग्रेस के दो अलग-अलग दल हैं। अजित पवार गुट ने सुनेत्रा पवार को नेतृत्व सौंपने का निर्णय लिया, जिसके बाद शपथग्रहण हुआ। यह निर्णय पूरी तरह राष्ट्रवादी कांग्रेस का आंतरिक निर्णय है। फडणवीस ने यह भी कहा कि यदि अजित पवार विलय को लेकर कोई चर्चा कर रहे थे, तो क्या वह भाजपा से चर्चा किए बिना ऐसा करते? यदि कोई बातचीत हो रही थी, तो भाजपा के साथ भी चर्चा जरूर होती। विलय या किसी भी बड़े निर्णय का अधिकार पूरी तरह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का है, लेकिन किसी भी फैसले से पहले सहयोगी दलों से चर्चा होना अपेक्षित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी की शुरुआत से ही स्पष्ट भूमिका रही है कि एनडीए में उनके सहयोगी अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस है। इसलिए सहयोगी दल द्वारा लिए गए निर्णयों के साथ खड़ा रहना भाजपा की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शपथग्रहण और समय से जुड़े फैसले परिस्थितियों के अनुसार लिए जाते हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उसी दिन राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनाए जाने का उदाहरण भी दिया।
अर्थ मंत्रालय को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए फडणवीस ने कहा कि फिलहाल बजट की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें कई विभागों की बैठकों और विस्तृत समीक्षा की जरूरत होती है। सुनेत्रा पवार हाल ही में उपमुख्यमंत्री बनी हैं और व्यक्तिगत दुख से उबरने की प्रक्रिया में हैं। ऐसे में फिलहाल अर्थ विभाग की जिम्मेदारी उनके पास ही रखने का निर्णय संयुक्त चर्चा के बाद लिया गया है। विधानसभा सत्र के बाद आगे की व्यवस्था पर चर्चा की जाएगी। पार्थ पवार को लेकर उठी खबरों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने किसी भी नाम का विरोध नहीं किया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस एक स्वतंत्र पार्टी है और उसके भीतर किसे पद देना है, किसे उम्मीदवार बनाना है या किसे राज्यसभा भेजना है, यह पूरी तरह राष्ट्रवादी का निर्णय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने को लेकर भाजपा के विरोध की खबरें निराधार हैं। फडणवीस ने अंत में कहा कि वे फिलहाल राजनीतिक विवाद नहीं बढ़ाना चाहते, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो वे कई बातों का विस्तृत खुलासा कर सकते हैं।



