
मुंबई। महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससीबी) घोटाले से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) विधायक रोहित पवार को गुरुवार को विशेष अदालत ने ज़मानत दे दी। यह मामला उनकी कंपनी बारामती एग्रो लिमिटेड द्वारा कन्नड़ सहकारी चीनी मिल की कथित धोखाधड़ी वाली नीलामी से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल ही में पवार और अन्य के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दायर किया था, जिसमें दावा किया गया कि जुलाई 2009 में SARFAESI अधिनियम के तहत शिखर बैंक ने 80.56 करोड़ रुपए के बकाया ऋण की वसूली के लिए इस मिल को ज़ब्त किया और अगस्त 2012 में इसे संदिग्ध परिस्थितियों में कम कीमत पर नीलाम कर दिया गया। आरोपपत्र के मुताबिक सबसे ऊँची बोली लगाने वाले को तकनीकी आधार पर अयोग्य घोषित किया गया और पवार से कथित तौर पर जुड़े एक अन्य बोलीदाता को लाभ पहुंचाया गया, जिसके पास न तो चीनी मिल चलाने की क्षमता थी और न ही वित्तीय विशेषज्ञता। अंततः यह सौदा बारामती एग्रो लिमिटेड के हाथ में आया। विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण नवंदर ने टिप्पणी की कि नीलामी प्रक्रिया धोखाधड़ी से संचालित हुई और साक्ष्य रोहित पवार की सक्रिय संलिप्तता दर्शाते हैं, साथ ही बारामती एग्रो और उसके सहयोगियों के बीच परिणामों में हेरफेर की साज़िश भी सामने आई। इसके बावजूद अदालत ने पवार की ज़मानत याचिका स्वीकार कर ली। इसी मामले में व्यवसायी राजेंद्र इंगवाले और उनके सहयोगियों को भी तलब किया गया है। ईडी इस घोटाले की व्यापक जाँच कर रही है, जिसमें कई राजनीतिक नेताओं और चीनी मिल मालिकों के नाम सामने आ रहे हैं।




