Wednesday, March 18, 2026
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उपराष्ट्रपति चुनाव: एनडीए के राधाकृष्णन के खिलाफ विपक्ष ने बी सुदर्शन रेड्डी को उतारा, होगा दिलचस्प मुकाबला

नई दिल्ली। देश में 17वां उपराष्ट्रपति चुनाव इस बार कई कारणों से चर्चा में है। पिछले महीने जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद खाली हुए इस पद के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को अनरेपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतार दिया है। बीजेपी चाहती थी कि यह चुनाव सर्वसम्मति से संपन्न हो, लेकिन 19 अगस्त को इंडिया ब्लॉक द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद अब यह मुकाबला और रोचक हो गया है। संख्या बल के आधार पर एनडीए को बढ़त है, लेकिन विपक्ष इस चुनाव को वैचारिक संघर्ष के रूप में पेश कर रहा है।
दक्षिण भारत से दोनों उम्मीदवार
चुनाव दिलचस्प इसलिए भी है क्योंकि दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से आते हैं। सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु से हैं और लंबे समय से आरएसएस से जुड़े रहे हैं, जबकि जस्टिस सुदर्शन रेड्डी आंध्र प्रदेश से आते हैं और उन्हें एक गैर-राजनीतिक, प्रतिष्ठित न्यायविद के रूप में देखा जा रहा है। इस समीकरण से आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू (तेदेपा) और वाईएसआरसीपी प्रमुख व राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी पर दबाव बढ़ गया है। दोनों नेताओं ने अब तक केंद्र सरकार के साथ सहयोगी रुख अपनाया है, लेकिन अपने ही राज्य के पूर्व न्यायाधीश को दरकिनार करना उनके लिए आसान नहीं होगा। इंडिया ब्लॉक की रणनीति साफ है—एनडीए के राजनीतिक और वैचारिक उम्मीदवार के सामने एक गैर-राजनीतिक, निष्पक्ष छवि वाले व्यक्ति को खड़ा करना। कांग्रेस के दक्षिण भारत प्रभारी मणिकम टैगोर ने कहा, हमने एक प्रतिष्ठित न्यायविद को मैदान में उतारा है, जबकि एनडीए ने एक आरएसएस कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाया है। हमारे पास संख्या बल भले ही कम हो, लेकिन हमारा संदेश स्पष्ट है। हम विचारधारा से समझौता नहीं करेंगे। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष ने उम्मीदवार के चयन को लेकर कई नामों पर विचार किया था। इनमें तमिलनाडु के वरिष्ठ वैज्ञानिक और पूर्व इसरो अधिकारी एम. अन्नादुरई का नाम भी शामिल था। लेकिन अंततः आंध्र प्रदेश के जस्टिस रेड्डी पर सहमति बनी, ताकि चुनाव को “वैचारिक और पेशेवर बनाम राजनीतिक” की जंग के रूप में पेश किया जा सके।
आंध्र और तमिलनाडु की राजनीति पर असर
यह चुनाव आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु दोनों राज्यों की राजनीति पर असर डाल सकता है। तमिलनाडु में भाजपा का प्रभाव सीमित है, लेकिन राधाकृष्णन वहां के एक सम्मानित नेता माने जाते हैं। दूसरी ओर, जस्टिस रेड्डी का आंध्र से होना नायडू और जगन को मुश्किल स्थिति में डालता है। वे केंद्र से अपने रिश्ते बिगाड़ना नहीं चाहेंगे, लेकिन अपने ही राज्य के एक न्यायाधीश को नजरअंदाज करना भी राजनीतिक जोखिम बन सकता है।
चुनाव प्रक्रिया और तारीखें
भारतीय चुनाव आयोग के मुताबिक, उपराष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना 7 अगस्त को जारी हो चुकी है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 21 अगस्त तय की गई है। नामांकन पत्रों की जांच 22 अगस्त को होगी, जबकि 25 अगस्त तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। मतदान 9 सितंबर को होगा और उसी दिन मतगणना भी संपन्न कर दी जाएगी। संख्या बल के कारण एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन इंडिया ब्लॉक ने इस चुनाव को केवल औपचारिकता बनने से रोक दिया है। विपक्ष ने इसे वैचारिक संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों की लड़ाई का रूप देने की कोशिश की है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के क्षेत्रीय दल क्या रुख अपनाते हैं और यह मुकाबला कितना कड़ा बनता है।

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