
मुंबई। विकास परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर हो रही पेड़ों और झाड़ियों की कटाई पर चिंता जताते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने निगरानी और नियमन के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और राज्य पर्यावरण विभाग के अधिकारियों की एक विशेष समिति गठित करने का सुझाव दिया है। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले की पीठ ने कहा कि शहरीकरण और बुनियादी ढाँचे का विस्तार अक्सर पर्यावरण की कीमत पर हुआ है, इसलिए विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन बेहद ज़रूरी है। प्रस्तावित समिति जनहित परियोजनाओं के नाम पर होने वाली पेड़ों की कटाई की समीक्षा करेगी और ऐसे विकल्प सुझाएगी जिनसे न्यूनतम पेड़ काटने पड़ें और पारिस्थितिक क्षति कम हो। अदालत ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि समिति की सिफारिशें किस स्तर पर लागू की जाएँगी और समिति की संरचना व शक्तियों का दायरा क्या होगा। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि समिति के सुझाव समय रहते लिए जाएँ ताकि उन्हें परियोजनाओं के डिज़ाइन और क्रियान्वयन में शामिल किया जा सके। इस संबंध में राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया गया है और अगली सुनवाई 3 सितंबर 2025 को होगी। पर्यावरणविदों ने अदालत की पहल का स्वागत करते हुए इसे मुंबई और महाराष्ट्र के सिमटते हरित क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अहम कदम बताया है।




