
मुंबई। भारतीय सेना की पूर्वी कमान की पहल “ऑपरेशन सद्भावना” के अंतर्गत राष्ट्रीय एकता यात्रा पर निकले सिक्किम विश्वविद्यालय के छात्रों ने हाल ही में महाराष्ट्र के राजभवन का भ्रमण किया। इस अवसर पर राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने छात्रों का स्वागत करते हुए कहा कि यह पहल भारत के लोकतांत्रिक और समावेशी मूल्यों को सशक्त करती है। उन्होंने विश्वास जताया कि सिक्किम के युवाओं की सक्रिय भागीदारी देश के एकजुट भविष्य को नई दिशा देगी। राजभवन में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मेजर सृजन सिंह नेगी, मेजर आरती रावत, और सिक्किम विश्वविद्यालय के 15 छात्र व शिक्षक उपस्थित थे। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए विविधता में एकता के भारतीय सिद्धांत पर बल दिया और कहा कि यह यात्रा न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम है, बल्कि देशभक्ति और उत्तरदायित्व की भावना को भी प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की संस्कृति, भूगोल और सामाजिक परंपराओं को जानने का अवसर छात्रों को एक जीवनपर्यंत सीख देगा। मेजर नेगी ने इस दौरान छात्रों द्वारा राज्य के विभिन्न ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों की गई यात्राओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह यात्रा न केवल भारत के विभिन्न हिस्सों को जानने-समझने का अवसर है, बल्कि सेना और समाज के बीच सेतु निर्माण की दिशा में एक ठोस कदम भी है। राजभवन के आतिथ्य से छात्र अत्यंत प्रभावित नजर आए। छात्र लकचुम लेक्चा, सोनम लेक्चा और लाका डोमा ने कहा कि यह उनके जीवन की पहली हवाई यात्रा थी और मुंबई को प्रत्यक्ष देखने का अनुभव उनके लिए बेहद रोमांचक रहा। “फिल्मों में जो मुंबई देखी थी, आज उसे सजीव रूप में देखने का अवसर मिला,” छात्रों ने कहा। ऊँची इमारतें, समुद्र की विशाल लहरें, ऐतिहासिक स्थल, और बाजारों की चहल-पहल ने छात्रों को अभिभूत कर दिया। उन्होंने गिरगांव चौपाटी, अटल सेतु, गेटवे ऑफ इंडिया जैसे स्थलों का भ्रमण किया और एनडीए जैसी प्रतिष्ठित संस्था में अनुशासन और प्रशिक्षण का अनुभव भी प्राप्त किया। छात्रों ने कहा कि राज्यपाल से मिलना गर्व की बात थी और इस दौरे से मिली प्रेरणा उन्हें भविष्य में देश सेवा के मार्ग पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करेगी। राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि युवाओं के ऐसे अनुभव राष्ट्रीय एकता और भाईचारे को मज़बूती देते हैं। उन्होंने सेना की इस पहल की सराहना करते हुए इसे ‘राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक सांस्कृतिक संवाद’ की संज्ञा दी। “ऑपरेशन सद्भावना” की यह यात्रा छात्रों के लिए न केवल एक शैक्षणिक अनुभव रही, बल्कि राष्ट्रीय चेतना को भी जागृत करने वाली पहल साबित हुई।




