
मुंबई। राज्य में नदियों के किनारों पर बाढ़ रेखा (ब्लू लाइन) से संबंधित नए विवादों और अतिक्रमण के मामलों के चलते राजस्व और जल संसाधन विभाग द्वारा दोबारा सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया गया है। यह जानकारी महाराष्ट्र विधान परिषद में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दी। उन्होंने बताया कि बदलापुर के पास उल्हास नदी बेसिन में हो रहे अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई की जा रही है। सदस्य एडवोकेट अनिल परब द्वारा उठाए गए प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बताया कि उल्हास नदी तट क्षेत्र से मिट्टी का अवैध उत्खनन कर उसे नदी तल में फेंका गया है, जिससे पर्यावरणीय संकट और जल प्रवाह में बाधा उत्पन्न हुई है। इसके लिए गौण खनिजों और मशीनरी के उपयोग को लेकर कुल १० करोड़ १६ लाख १७ हजार १४१ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही, प्रक्रिया में प्रयुक्त मशीनें जब्त कर ली गई हैं और जुर्माना वसूलने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मंत्री ने बताया कि ब्लू लाइन को लेकर वर्तमान समय में अनेक स्थानों पर भ्रम और विवाद की स्थिति है। इसीलिए ब्लू लाइन के निर्धारण के लिए दोबारा वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाएगा, जिससे भविष्य में अतिक्रमण या अवैध निर्माण को रोका जा सके। गणपत पाटिल नगर, दहिसर क्षेत्र में भरण कार्य से जुड़े उप-प्रश्न पर मंत्री ने कहा कि तीन दिनों के भीतर राजस्व विभाग के अधिकारी स्थल का निरीक्षण करेंगे और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। विधान परिषद में इस चर्चा में सदस्य प्रवीण दारेकर, सतेज पाटिल और डॉ. मनीषा कायंदे ने भी भाग लिया। मंत्री बावनकुले ने आश्वस्त किया कि कोंकण क्षेत्र में समुद्र तट और नदी किनारे की राजस्व भूमि पर हो रहे अतिक्रमणों की जाँच की जा रही है और उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस प्रकार, राज्य सरकार ने नदी और समुद्री तटीय क्षेत्रों में हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि पर्यावरण और नागरिक सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।




