
मुंबई। महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी भाषियों के बीच भाषा को लेकर उपजा विवाद अब तीव्र राजनीतिक रंग ले चुका है। हाल ही में मुंबई महानगर क्षेत्र में हिंदी भाषी लोगों पर कथित हमलों की घटनाओं के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। भाजपा नेता और राज्य के मंत्री आशीष शेलार ने रविवार को इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए उन्हें “धर्म के नाम पर हिंसा जैसी” करार दिया और इनकी तुलना जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले से कर दी। शेलार ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक नेता इन घटनाओं का मौन समर्थन कर रहे हैं और “अन्य हिंदुओं की पिटाई का आनंद ले रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में भाजपा मराठी अस्मिता की रक्षा तो करेगी ही, लेकिन साथ ही गैर-मराठी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
मनसे कार्यकर्ताओं पर हिंसा के आरोप
यह विवाद तब और भड़क उठा जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं ने मुंबई में मराठी न बोलने वाले एक मिठाई दुकानदार पर हमला किया। इसके अतिरिक्त, शनिवार को मनसे कार्यकर्ताओं ने वर्ली स्थित शेयर बाजार विश्लेषक सुशील केडिया के कार्यालय में कथित तोड़फोड़ की। केडिया ने पहले एक सार्वजनिक बयान में कहा था कि वह मराठी नहीं बोलेंगे और राज ठाकरे को खुली चुनौती दी थी।
सत्ताधारी नेताओं की प्रतिक्रिया
भाजपा नेता नितेश राणे ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसे हमले हिंदुओं को हिंदुओं से लड़ाने का प्रयास हैं और इससे सामाजिक ताना-बाना बिगड़ता है। शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता प्रताप सरनाईक ने भी कहा कि मराठी भाषा पर सिर्फ मनसे का एकाधिकार नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस विवाद पर हस्तक्षेप करते हुए कहा- भाषा को लेकर हिंसा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कानून अपने हाथ में लेने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।




