
मुंबई। भारत के मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई ने आज गिरगांव स्थित चिकित्सक समूह शिरोळकर विद्यालय का दौरा किया और अपने बचपन की स्मृतियों को ताज़ा किया। इसी विद्यालय से प्राथमिक से माध्यमिक तक की शिक्षा प्राप्त करने वाले न्यायमूर्ति गवई ने इस अवसर पर अपने व्यक्तित्व निर्माण में योगदान देने वाले शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस विशेष अवसर पर महाराष्ट्र के कौशल विकास मंत्री एवं मुंबई शहर के पालक मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा, बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति माधव जमादार, चिकित्सक समूह के अध्यक्ष किशोर रांगणेकर, सचिव डॉ. गुरुनाथ पंडित, मुख्याध्यापिका संचिता गावडे तथा अन्य मान्यवर उपस्थित थे। अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश श्री. गवई ने कहा, आज मैं जिस ऊँचाई तक पहुँचा हूँ, उसमें मेरे शिक्षकों और इस स्कूल का बहुत बड़ा योगदान है। इसी स्कूल से मिले शिक्षण और संस्कारों ने मेरे जीवन को सही दिशा दी। मेरा भाषण कौशल भी यहीं से शुरू हुआ। वकृत्व स्पर्धाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मुझे आत्मविश्वास मिला, और इन्हीं अवसरों ने मुझे गढ़ा। उन्होंने आगे कहा, “मैं स्वयं मराठी माध्यम से पढ़ा हूँ। मातृभाषा में पढ़ाई करने से विषयों की गहराई से समझ मिलती है और साथ ही अच्छे संस्कार भी मिलते हैं जो जीवन भर साथ रहते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को यही विश्वास दिलाया। मुख्य न्यायाधीश गवई ने विद्यालय की कक्षाएँ, वाचनालय, चित्रकला विभाग आदि का निरीक्षण किया तथा अपने पुराने सहपाठियों से मिलकर पुरानी यादें ताज़ा कीं। विद्यार्थियों द्वारा दी गई मानवंदना को उन्होंने अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण क्षण बताया। उनकी उपस्थिति विद्यालय के लिए अत्यंत प्रेरणादायी सिद्ध हुई।




