
मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा में खाद्य सुरक्षा और प्रतिबंधित पदार्थों के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) मंत्री नरहरि जिरवाल ने बताया कि राज्य सरकार ने निरीक्षण प्रणाली को अधिक सक्षम, आधुनिक और प्रभावी बनाने हेतु कई ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि खाद्य निरीक्षण प्रणाली को सशक्त करने के लिए विभाग में हाल ही में 189 अधिकारियों की भर्ती की गई है, जिनका प्रशिक्षण वर्तमान में चल रहा है। विधायक श्वेता महाले द्वारा प्रस्तुत रुचि के बिंदु पर हुई चर्चा में सदस्यों विक्रम पाचपुते, प्रवीण दटके, मनोज घोरपड़े, कृष्णा खोपड़े, रमेश बोरनारे, मुरजी पटेल, नारायण कुचे, अनंत नार और मनीषा चौधरी ने भाग लिया। इस पर जवाब देते हुए मंत्री जिरवाल ने बताया कि राज्य सरकार की नीति है कि प्रत्येक विभाग में अलग प्रयोगशाला हो, और इसी दिशा में वर्तमान में तीन प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं, जबकि तीन अन्य का निर्माण कार्य प्रगति पर है। खाद्य पदार्थों की जांच की संख्या बढ़ाने हेतु निजी प्रयोगशालाओं को अनुबंधित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है और इसके लिए केंद्र सरकार से अनुमति भी मांगी गई है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की निगरानी और स्कूल-कॉलेज परिसरों में गुटखा जैसे प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए पुलिस विभाग के साथ समन्वय कर विशेष निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा। मंत्री ने यह भी बताया कि ऑनलाइन खाद्य विक्रेताओं पर नियंत्रण रखने और उपभोक्ता शिकायतों के समाधान के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-1800-365 शुरू किया गया है। 1 अप्रैल 2025 से 31 मई 2025 के बीच राज्य में की गई कार्रवाई के दौरान 53 मामलों में कुल ₹3.29 करोड़ मूल्य की प्रतिबंधित खाद्य सामग्री जब्त की गई है। इसके साथ ही 10 वाहन जब्त किए गए और 14 प्रतिष्ठानों को सील किया गया। मंत्री जिरवाल ने कहा कि गुटखा, सुगंधित तंबाकू, पान मसाला, सुगंधित सुपारी जैसे प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों के उत्पादन, बिक्री, वितरण, भंडारण और परिवहन के विरुद्ध नियमित रूप से सख्त कार्रवाई की जा रही है।




