
मुंबई। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्र और राज्य सरकारों, साथ ही भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को शराब की बोतलों पर कैंसर संबंधी चेतावनी लेबल अनिवार्य करने की मांग वाली जनहित याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ 24 वर्षीय पुणे निवासी यश चिलवार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में यह तर्क दिया गया था कि शराब पर कैंसर की चेतावनी न होने से शराब के सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में उपभोक्ताओं को जानकारी नहीं मिल रही है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। याचिका में यह भी कहा गया कि उपभोक्ताओं को उनके द्वारा उपभोग किए जाने वाले उत्पादों के बारे में पूरी और सटीक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है। याचिका में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की 25 जून, 2024 की रिपोर्ट का हवाला दिया गया, जिसमें शराब के सेवन से 3 मिलियन से अधिक मौतों का उल्लेख किया गया है और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
WHO ने शराब को क्लास I कार्सिनोजेन के रूप में वर्गीकृत किया है, लेकिन यह चेतावनी शराब की बोतल पर नहीं दी जाती। याचिका में आयरलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देशों का उदाहरण दिया गया है, जिन्होंने पहले ही शराब पर ऐसी चेतावनियाँ अनिवार्य कर दी हैं। इसमें अमेरिकी सर्जन-जनरल की सलाह का भी उल्लेख किया गया, जिसमें कहा गया है कि शराब से कम से कम सात प्रकार के कैंसर हो सकते हैं, जिससे शराब पर कैंसर की चेतावनी का महत्व और बढ़ जाता है। संविधान के अनुच्छेद 47 का हवाला देते हुए याचिका में तर्क किया गया है कि शराब से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को कम करने के लिए कैंसर की चेतावनी जरूरी है। इसके साथ ही याचिका में यह भी मांग की गई कि केंद्र शराब की बोतलों पर कैंसर चेतावनी के लिए समयबद्ध रूप से नियम बनाए और इसका पालन सुनिश्चित करें। अदालत ने इस मामले में अधिकारियों को अपनी प्रतिक्रिया देने का निर्देश दिया है।




