
मुंबई। मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने राज्य के व्यावसायिक डिग्री पाठ्यक्रमों की फीस को लेकर चल रही अनिश्चितता खत्म करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब बीबीए, बीसीए, बीबीएम, बीएमएस और इंटीग्रेटेड एमबीए जैसे पाठ्यक्रमों की फीस तय करने का अधिकार संबंधित विश्वविद्यालयों को दे दिया गया है। मंत्री पाटील ने बताया कि शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के लिए विश्वविद्यालयों को फीस निर्धारण के निर्देश पहले ही दिए गए थे। इसी क्रम में छात्रहित को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि 2024-25 में तय की गई फीस ही शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में भी लागू रहेगी। इस फैसले से फीस संरचना में एकरूपता और स्पष्टता आएगी। उन्होंने कहा कि अब तक फीस निर्धारण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं होने से छात्रों को विशेष रूप से छात्रवृत्ति आवेदन के दौरान कई तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब विश्वविद्यालयों को यह अधिकार मिलने से पाठ्यक्रमों की मान्यता, फीस संरचना और छात्रवृत्ति प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो सकेगी। इस निर्णय से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को विशेष लाभ मिलेगा। साथ ही छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया तेज होगी और विद्यार्थी समय पर अपने आवेदन जमा कर सकेंगे। मंत्री पाटील ने विश्वास जताया कि इस कदम से व्यावसायिक शिक्षा अधिक पारदर्शी और सुलभ बनेगी, जिससे छात्रों को बड़ा राहत मिलेगा।




