
मनोज कुमार अग्रवाल
बहुत बड़े संघर्ष और बलिदान के बाद मिली आज़ादी के 80 वर्ष पूरे हो रहे हैं। हुक्मरानों के आह्वान पर देश में घर-घर तिरंगा फहराया गया। राजपथ से जनपथ तक रोशनी की झालरें जगमगा रही हैं। लेकिन इस खुशहाल तस्वीर के पीछे एक दूसरी हकीकत भी है। एक ओर अमेरिका का टैरिफ है, चीन की दादागिरी है, पाकिस्तान की नापाक साजिशें हैं तो दूसरी ओर देश के भीतर बेरोजगारी, गरीबी, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता और सस्ते-सुलभ न्याय का अभाव है। पूंजीवाद के हाथों में जकड़ती लोकतांत्रिक व्यवस्था है। इन नारों और उम्मीदों के बीच आम आदमी महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से कराह रहा है।
बेरोजगारी: युवाओं की सबसे बड़ी चुनौती
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश में कुल बेरोजगारी दर लगभग 5.5% है। ग्रामीण क्षेत्र में यह 5.1% और शहरी क्षेत्र में 6.4% से 6.6% के बीच है। लेकिन 15 से 29 आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर 15% से 16% तक पहुंच गई है। कौशल की कमी और तकनीक आधारित बदलावों के कारण गुणवत्तापूर्ण पूर्णकालिक नौकरियों का संकट गहराया है।
गरीबी और भुखमरी की दोहरी मार
विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार लगभग 23.4 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी में जीने को मजबूर हैं। विश्व बैंक के अनुसार 7.5 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी रेखा से नीचे हैं। $4.20 प्रतिदिन के मानक पर यह संख्या 34.2 करोड़ तक पहुंच जाती है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2025 में 123 देशों में भारत 102वें स्थान पर है। स्कोर 25.8 के साथ स्थिति गंभीर श्रेणी में है। 32.9% बच्चे बौनेपन और 18.7% बच्चे कमजोरी के शिकार हैं। बाल मृत्यु दर 2.8% है। 2020 में भारत 94वें स्थान पर था, अब और फिसल गया है। विडंबना यह कि एक ओर भुखमरी है तो दूसरी ओर 10.4 करोड़ टन अनाज सरकारी गोदामों में सड़ रहा है।
भ्रष्टाचार और बढ़ती असमानता
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2025 में भारत 182 देशों में 91वें स्थान पर है। स्कोर 100 में से 39 है। पड़ोसी देशों से बेहतर लेकिन चीन और भूटान से पीछे। विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 बताती है कि भारत में शीर्ष 10% लोगों के पास राष्ट्रीय आय का 58% हिस्सा है। शीर्ष 1% के पास कुल संपत्ति का 40% है। जबकि निचले 50% को केवल 15% आय मिलती है। महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर केवल 15.7% है।
न्याय बना इंतजार और साइबर अपराध
देश की अदालतों में 5.64 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट में 96 हजार, हाईकोर्ट में 63.76 लाख और निचली अदालतों में 4.98 करोड़ केस पेंडिंग हैं। अगली तारीख के कारण लाखों पीड़ित न्याय के इंतजार में दुनिया छोड़ जाते हैं। एनसीआरबी के अनुसार साइबर अपराध में 17-18% की वृद्धि हुई है। कुल साइबर मामलों में 72% वित्तीय ठगी के हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध में मामूली कमी आई है, लेकिन बच्चों से जुड़े मामलों में 7.8% बढ़ोतरी दर्ज की गई।
राष्ट्रीय चरित्र में गिरावट
सबसे चिंताजनक राष्ट्रीय चरित्र में गिरावट है। भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं, सामान्य बात बन गया है। लोग अधिकारों के प्रति जागरूक हैं पर कर्तव्य भूल रहे हैं। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, कानून तोड़ना और दुर्घटना पर मदद की जगह वीडियो बनाना आम हो गया है। राजनीतिक दलों की प्रतिद्वंद्विता के कारण संसद सबसे कम समय तक चली। विपक्ष ने सदन को अखाड़ा बनाया और सत्ता पक्ष आम सहमति बनाने में नाकाम रहा। नीट पेपर लीक पर हुए प्रदर्शन में युवा आक्रोश के साथ-साथ अराजकता और असंयमित भाषा भी देखी गई। आजादी की वर्षगांठ पर हमें जश्न के साथ आत्ममंथन भी करना होगा। अंतर्राष्ट्रीय दबाव, घरेलू स्वार्थ और नैतिक गिरावट के इस दौर में केवल नारे काफी नहीं। बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी, भ्रष्टाचार और न्याय की लड़ाई लड़ने का संकल्प लेना होगा। आइए आजादी का पर्व मनाएं, लेकिन अधिक गर्व त्यागकर एक श्रेष्ठ भारत के निर्माण में जुटें। तभी देश की आजादी और सम्मान सुरक्षित रह पाएगा।

