Saturday, April 25, 2026
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों ‘गोदावरी से नर्मदा’ जलयात्रा का भव्य शुभारंभ

‘सूखा-मुक्त’ महाराष्ट्र और निर्मल नदियों का संकल्प

नासिक। जल संकट, प्रदूषण और अनियमित वर्षा जैसी चुनौतियों के बीच जलसंवर्धन आज देश की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है। इसी दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘गोदा ते नर्मदा’ जलयात्रा की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण के प्रति जनजागरण और नदियों के पुनर्जीवन को बढ़ावा देना है। शनिवार को पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर की त्रिशताब्दी जयंती के अवसर पर श्रीक्षेत्र त्र्यंबकेश्वर में जलसंपदा विभाग द्वारा आयोजित ‘गोदावरी से नर्मदा’ जलयात्रा का भव्य शुभारंभ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों किया गया। इस अवसर पर अन्न व नागरी आपूर्ति मंत्री छगन भुजबळ, जलसंपदा मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, गिरीश महाजन सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य को ‘सूखा-मुक्त’ बनाने के लिए नदी जोड़ परियोजना को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही, आगामी सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 के मद्देनज़र गोदावरी नदी को स्वच्छ और अविरल बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ‘विचार, वारसा और विकास’ के सिद्धांत पर आधारित यह जलयात्रा जनभागीदारी को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने भारतीय संस्कृति में नदियों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वेदों में नदियों को ‘माता’ का दर्जा दिया गया है। गोदावरी नदी महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश दोनों के लिए जीवनरेखा है, इसलिए इसे बारहमासी बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जल प्रबंधन, घाटों और बावड़ियों के निर्माण के माध्यम से समाज को स्थायी समाधान दिए। उनके कार्यों में आध्यात्मिकता और उपयोगिता का संतुलन देखने को मिलता है, जो आज भी प्रेरणादायक है। राज्य सरकार इस ऐतिहासिक जल विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि अहिल्यादेवी होळकर और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे महान व्यक्तित्वों के विचारों को अपनाकर ही समतामूलक और सतत विकास संभव है। यह जलयात्रा न केवल जलसंवर्धन का संदेश देगी, बल्कि समाज में जागरूकता और सहभागिता को भी मजबूत करेगी।

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