
मुंबई। मानसून के दौरान हुई दो अलग-अलग घटनाओं के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा इंजीनियरों और अधिकारियों को निलंबित किए जाने के विरोध में म्युनिसिपल इंजीनियर्स यूनियन (एमईयू) ने सोमवार को एम-पश्चिम वार्ड कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। यूनियन ने आरोप लगाया कि बिना निष्पक्ष जांच और व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय किए इंजीनियरों को निलंबित करना अन्यायपूर्ण है और तत्काल सभी निलंबन आदेश वापस लिए जाएं। यूनियन का कहना है कि किसी भी अधिकारी या इंजीनियर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तभी की जानी चाहिए जब विस्तृत जांच में उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से साबित हो जाए। बिना प्रारंभिक जांच के सीधे निलंबन की कार्रवाई कर्मचारियों का मनोबल गिराने वाली है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह चेंबूर में पेड़ गिरने की घटना में 11 वर्षीय विहान श्रीवास्तव की मौत के बाद बीएमसी ने तीन इंजीनियरों को निलंबित कर दिया था। वहीं, एल वार्ड में खुले मैनहोल में गिरने से 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत के मामले में सहायक नगर आयुक्त सहित चार अधिकारियों को भी निलंबित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान एमईयू के प्रतिनिधिमंडल ने उप नगर आयुक्त संध्या नांदेड़कर और नगर आयुक्त अश्विनी भिडे से मुलाकात कर निलंबन आदेश रद्द करने की मांग की। यूनियन के अध्यक्ष अशोक जाधव ने कहा कि बीएमसी ने न तो प्रारंभिक जांच की और न ही विभागीय जांच पूरी होने का इंतजार किया। उन्होंने इस कार्रवाई को मनमाना बताते हुए कहा कि निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच के बाद ही किसी अधिकारी की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। बीएमसी प्रशासन के साथ हुई चर्चा के बाद यूनियन ने अपना प्रस्तावित आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया है। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि जांच रिपोर्ट आने तक किसी अन्य अधिकारी के खिलाफ नई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जांच पूरी होने से पहले इंजीनियरों और अधिकारियों के खिलाफ अन्यायपूर्ण कार्रवाई जारी रही, तो सभी नगर निगम कर्मचारी संगठन संयुक्त रूप से बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। इस बीच बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों मामलों की जांच रिपोर्ट जल्द ही आने की उम्मीद है। रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।



