Monday, March 16, 2026
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अश्विनी बिदरे हत्याकांड में 5 अप्रैल को आ सकता है फैसला

नवी मुंबई। नवी मुंबई के बहुचर्चित अश्विनी बिदरे हत्या मामले में शनिवार, 5 अप्रैल 2025 को फैसला सुनाए जाने की उम्मीद है। मामला पनवेल सत्र न्यायालय में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केजी पालदेवर के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है, जिससे करीब सात साल से चल रही सुनवाई का अंत हो सकता है। मुख्य आरोपी बर्खास्त पुलिस निरीक्षक अभय कुरुंदकर और अन्य सह-आरोपियों के भाग्य का फैसला अगले दो दिनों में हो सकता है। अदालत ने 85 गवाहों की जांच की है और लंबे समय से अनुमान था कि अप्रैल की शुरुआत में फैसला आ सकता है।
क्या है पूरा मामला?
बेलापुर के कोंकण भवन में नागरिक अधिकार संरक्षण इकाई में तैनात सहायक पुलिस निरीक्षक अश्विनी बिदरे 15 अप्रैल 2016 से लापता थीं। 14 जुलाई 2016 को उनके लापता होने की शिकायत दर्ज की गई, और जांच के दौरान 31 जनवरी 2017 को अपहरण का मामला दर्ज हुआ। जांच में सामने आया कि अश्विनी और कुरुंदकर कथित रूप से रिश्ते में थे। आरोप है कि 11 अप्रैल 2016 की रात, कुरुंदकर ने मीरा रोड स्थित अपने घर में अश्विनी बिदरे की हत्या कर दी। इसके बाद उसने लकड़ी काटने की मशीन से शव के टुकड़े किए और उन्हें फ्रीजर में रखा। अगले दिन, उसने शव को एक बोरे में भरकर वसई खाड़ी में फेंक दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या से पांच दिन पहले, कुरुंदकर ने एक कांस्टेबल से लकड़ी काटने की पावर आरी खरीदने को कहा था, जिसका इस्तेमाल शव को टुकड़े करने में किया गया। शव के टुकड़ों को 25 किलो के धातु के ब्लॉक्स से बांधकर वसई खाड़ी में डुबो दिया गया। जिस दुकान से ये वजन खरीदे गए थे, उसकी भी पहचान कर ली गई है।
हत्या के बाद भी चालाकी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या के बाद कुरुंदकर ने अश्विनी के फोन का इस्तेमाल कर उसके परिवार और विभाग को संदेश भेजे कि वह उत्तर भारत में ध्यान शिविर के लिए जा रही है। इसके अलावा, कुरुंदकर ने अपने गश्त ड्यूटी का गलत रिकॉर्ड तैयार किया और वाहन की रीडिंग में छेड़छाड़ कर अपने अपराध को छिपाने की कोशिश की। पाटिल और कुरुंदकर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से यह स्पष्ट हुआ कि 11 अप्रैल 2016 को दोनों की लोकेशन एक ही स्थान पर थी। इसी दिन अश्विनी बिदरे को आखिरी बार देखा गया था। तीनों की लोकेशन 11 अप्रैल को वसई क्रीक के पास थी और उसके बाद बिदरे लापता हो गईं। 14 अप्रैल को अश्विनी का फोन आखिरी बार ऑन हुआ और फिर कभी चालू नहीं हुआ।
क्या कहते हैं बिदरे के पति?
अश्विनी बिदरे के पति, राजू गोरे, जो पिछले सात साल से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं, को उम्मीद है कि इस बार न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा, मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि मुझे न्याय मिलेगा। अब सबकी नजरें 5 अप्रैल के फैसले पर टिकी हैं, जिससे इस जघन्य हत्याकांड का अंतिम निपटारा हो सकता है।

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