Monday, May 11, 2026
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सिंधी समाज ने संघर्ष को ताकत बनाकर देश के विकास में दिया बड़ा योगदान: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

नागपुर। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विभाजन के बाद शरणार्थी के रूप में भारत आए सिंधी समाज ने शून्य से शुरुआत की और आज व्यापार सहित देश के लगभग हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रविवार को वे विदर्भ सिंधी विकास परिषद की ओर से जरीपटका स्थित महात्मा गांधी हाईस्कूल परिसर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सिंधी समाज के लोगों को मालकी हक के पट्टों का वितरण किया गया तथा समाज के नगरसेवकों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में भगवानदास सवनानी, विधायक कुमार आयलानी, अमरावती के महापौर श्रीचंद तेजवानी, जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद, भारतीय सिंधू सभा के राष्ट्रीय संरक्षक घनश्याम कुकरेजा, सिंधी विकास परिषद के अध्यक्ष डॉ. विनकी रूघवानी, संयोजक वीरेंद्र कुकरेजा और सचिव पी.टी. दारा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। इस दौरान 36 नगरसेवकों का सत्कार किया गया, जिनमें 12 नवनिर्वाचित नगरसेवकों को मुख्यमंत्री के हाथों प्रतीकात्मक रूप से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि देश विभाजन के समय सिंधी समाज को अपना घर, जमीन और व्यापार छोड़कर भारत आना पड़ा। कई वर्षों तक उन्हें शरणार्थी शिविरों में जीवन बिताना पड़ा, लेकिन समाज ने अपने दर्द को संघर्ष की ताकत बनाया और आज हर क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सिंधी समाज को नागरिकता प्रदान करने के लिए देशव्यापी अभियान चलाया गया। सिंधी समाज जिन जमीनों पर रह रहा था, वे तकनीकी रूप से अतिक्रमण की श्रेणी में आती थीं। लंबे समय से समाज की मांग थी कि उन्हें जमीन के मालिकाना हक के पट्टे दिए जाएं। सरकार ने इस समस्या का समाधान करते हुए सिंधी समाज को वर्ग-1 के तहत 100 प्रतिशत मालिकाना हक देने का निर्णय लिया, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को जमीन के अधिकार मिलने का रास्ता साफ हुआ। मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि इस निर्णय को तेजी से लागू किया जाएगा और भविष्य में उल्हासनगर के सिंधी समाज के लिए अलग प्रकार की नियमितीकरण प्रक्रिया भी लागू की जाएगी।
350 सिंधी परिवारों को मिले मालिकाना हक के पट्टे
भारत विभाजन के बाद पश्चिम पाकिस्तान से आए सिंधी विस्थापितों का नागपुर जिले के खामला, मेकोसाबाग और जरीपटका क्षेत्रों में पुनर्वास किया गया था। इन बस्तियों को अधिकृत विस्थापित कॉलोनी का दर्जा दिया गया। पिछले 70-75 वर्षों से यहां रह रहे सिंधी परिवारों ने नागपुर के आर्थिक, सामाजिक और व्यापारिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम में 350 सिंधी परिवारों को मालिकाना हक के पट्टे वितरित किए गए। मुख्यमंत्री के हाथों 12 लाभार्थियों को प्रतीकात्मक रूप से पट्टे प्रदान किए गए।

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