नई दिल्ली। महाराष्ट्र के प्रशासनिक मुख्यालय मंत्रालय में 4 से 8 मई 2026 के दौरान आयोजित “टेकवारी 2.0” केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में सीखने, नवाचार, तकनीक और मानवीय मूल्यों को जोड़ने वाला अनूठा अभियान बनकर सामने आया। पांच दिवसीय इस आयोजन में शासन, तकनीक, स्वास्थ्य, संस्कृति और मानव संवेदनाओं का दुर्लभ संगम देखने को मिला। महाराष्ट्र की पारंपरिक “वारी” परंपरा से प्रेरित इस पहल का उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को बदलती तकनीकी दुनिया के अनुरूप तैयार करना था। कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग, इंडिया स्टैक और डिजिटल प्रशासन जैसे विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। वहीं दूसरी ओर योग, तनाव प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य, अभिभावकत्व और प्रशासनिक नैतिकता जैसे मानवीय पहलुओं को भी समान महत्व दिया गया। मंत्रालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में 6 हजार से अधिक कर्मचारियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि राज्यभर के लाखों कर्मचारी लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से जुड़े। कार्यक्रम का मूल संदेश यही था कि सीखने और परिवर्तन की इस यात्रा में कोई भी कर्मचारी पीछे न रहे। कार्यक्रम के दौरान “त्रिमूर्ति प्रांगण” सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, संगीत और ऊर्जा से जीवंत दिखाई दिया। “तालरंग”, “नादरंग”, “योगरंग” और “कलारंग” जैसी प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि आधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक विरासत एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। निलेश परब और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत “तालरंग” कार्यक्रम को प्रशासनिक समन्वय का प्रतीक बताया गया, जिसमें हर वाद्य और हर ताल को प्रशासन के विभिन्न विभागों और अधिकारियों के सामंजस्य से जोड़ा गया। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिव सहित वरिष्ठ प्रशासनिक नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि सीखना और बदलाव को स्वीकार करना शासन के हर स्तर की साझा जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में कॅपेसिटी बिल्डिंग कमिशन, यशदा (YASHADA), द योग इंस्टीट्यूट, मनशक्ति और नासकॉम (NASSCOM) जैसी संस्थाओं के विशेषज्ञों ने भाग लिया। AI, DPDP अधिनियम 2023, डिजिटल प्रशासन और साइबर सुरक्षा पर आयोजित चर्चाओं ने प्रशासन के तेजी से बदलते स्वरूप को रेखांकित किया। टेकवारी 2.0 के दौरान कई प्रशासनिक सुधार पहलों पर भी प्रकाश डाला गया। इनमें महाराष्ट्र का पहला एकीकृत HR प्लेटफॉर्म “MAHA eHRMS”, अनुकंपा नियुक्ति सुधार, छोटे डिजिटल शिक्षण उपक्रम “Small Bite, Big Leap”, सेवाकर्म एवं प्रशासनिक सुधार कार्यक्रम तथा भर्ती और सेवा नियमों में पारदर्शिता लाने के प्रयास शामिल रहे। कार्यक्रम के समापन पर यह संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि भविष्य का प्रशासन केवल तकनीक आधारित नहीं होगा, बल्कि उसमें सहानुभूति, नैतिकता, स्वास्थ्य और संस्कृति का संतुलन भी आवश्यक होगा। सामान्य प्रशासन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती वी. राधा के मार्गदर्शन में आयोजित “टेकवारी 2.0” ने यह स्थापित किया कि महाराष्ट्र प्रशासन भविष्य के लिए तैयार है और तकनीक के साथ मानवीय मूल्यों को जोड़कर आगे बढ़ना चाहता है।