Thursday, May 21, 2026
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भारतीय शेयर बाजार का बढ़ता दबदबा: दुनिया के शीर्ष एक्सचेंजों में शामिल हुआ एनएसई

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मुंबई। भारत का पूंजी बाजार तेजी से वैश्विक पहचान बना रहा है और इस बदलाव के केंद्र में National Stock Exchange of India (एनएसई) उभरकर सामने आया है। अमेरिकी डॉलर में बाजार पूंजीकरण के आधार पर एनएसई अब दुनिया के शीर्ष स्टॉक एक्सचेंजों में शामिल हो गया है। यह उपलब्धि भारतीय इक्विटी बाजार के बढ़ते विस्तार, घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और भारतीय कंपनियों पर वैश्विक भरोसे को दर्शाती है।
इस उपलब्धि के साथ एनएसई ने NASDAQ, न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज, शंघाई स्टॉक एक्सचेंज और जापान एक्सचेंज ग्रुपजैसे विश्व के प्रभावशाली स्टॉक एक्सचेंजों की श्रेणी में स्थान बना लिया है। स्थापना के मात्र तीन दशकों में एनएसई भारत की आर्थिक संरचना का मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है।
13 करोड़ के पार पहुंचे निवेशक खाते
एनएसई के अप्रैल 2026 के “मार्केट पल्स” रिपोर्ट के अनुसार एक्सचेंज पर निवेशक खातों की संख्या 13 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा देशभर में इक्विटी निवेश के तेजी से बढ़ते प्रसार को दर्शाता है। एक समय शेयर बाजार को केवल महानगरों और संपन्न परिवारों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब छोटे शहरों और अर्धशहरी क्षेत्रों में भी लोग बड़ी संख्या में निवेश कर रहे हैं। डिजिटल ऑनबोर्डिंग, मोबाइल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और बढ़ती वित्तीय जागरूकता ने इस बदलाव को गति दी है।
युवाओं का तेजी से बढ़ रहा रुझान
रिपोर्ट के अनुसार एनएसई पर पंजीकृत लगभग 40 प्रतिशत निवेशक 30 वर्ष से कम आयु के हैं। निवेशकों की औसत आयु घटकर करीब 33 वर्ष रह गई है। इससे साफ है कि नई पीढ़ी शेयर बाजार को दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम मान रही है।
महाराष्ट्र सबसे आगे
निवेशक भागीदारी के मामले में महाराष्ट्र देश में पहले स्थान पर है, जबकि उत्तर प्रदेश और गुजरात क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। देश के शीर्ष 10 राज्यों का एनएसई के कुल निवेशक खातों में 73 प्रतिशत से अधिक योगदान है।एनएसई की पहुंच अब भारत के लगभग 99.85 प्रतिशत पिन कोड क्षेत्रों तक फैल चुकी है। यह घरेलू बचत के तेजी से वित्तीय निवेश में बदलने और पूंजी बाजारों की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।
एनएसई की मजबूती के पीछे ये बड़े कारण
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में पारंपरिक बचत साधनों जैसे सोना और रियल एस्टेट से निवेशकों का रुझान धीरे-धीरे इक्विटी और म्यूचुअल फंड जैसी वित्तीय परिसंपत्तियों की ओर बढ़ रहा है। एसआईपी निवेश में लगातार बढ़ोतरी, घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रियता और मजबूत आईपीओ बाजार ने इस परिवर्तन को मजबूती दी है। डेरिवेटिव ट्रेडिंग के क्षेत्र में भी एनएसई का वैश्विक दबदबा कायम है। कारोबार किए गए अनुबंधों की संख्या के आधार पर यह दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज माना जाता है। मजबूत तकनीकी ढांचा, बेहतर तरलता और खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने एनएसई को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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